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सारंडा में वाइल्डलाइफ सेंचुरी के विरोध में हुई आमसभा, मंत्री ने कहा – जनता की भावनाओं को सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाएगी सरकार

चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिला स्थित सारंडा वन क्षेत्र को वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित करने के प्रस्ताव के विरोध में झारखंड सरकार की ओर से गुरुवार को रोवांम फुटबॉल मैदान में एक विशाल आमसभा का आयोजन किया गया. इसमें लगभग 2500 ग्रामीणों ने भाग लिया और तीन घंटे तक लगातार अपनी राय रखी. ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि सेंचुरी बनने से उनकी संस्कृति, परंपरा और आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा.

कार्यक्रम की शुरुआत सारंडा डीएफओ अभिरूप सिन्हा के संबोधन से हुई. उन्होंने बताया कि इस आमसभा का उद्देश्य ग्रामीणों की राय लेकर उसे सरकार तक पहुंचाना है. इसके बाद क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने क्रमवार अपने विचार रखे. मानकी सारंडा पीढ़ लगुड़ा देवगम ने कहा कि यदि सेंचुरी बनती है तो पहले ग्रामीणों के विकास और पुनर्वास की गारंटी दी जानी चाहिए. रोवांम के रामो सिद्धू ने खदानों द्वारा जंगल और नदी-नालों को बर्बाद करने पर नाराजगी जताई और कहा कि स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है.

पंचायत समिति सदस्य रामेश्वर चांपिया ने ग्रामसभा की अनुमति के बिना सेंचुरी के औचित्य पर सवाल उठाया. अमर सिंह सिद्धू ने कहा कि सेंचुरी बनने से आदिवासी परंपराएं समाप्त हो जाएंगी. मुंडा रोवांम बुद्धराम सिद्धू, मदन सिद्धू और जयराम कुरकुद ने भी कहा कि निर्णय से पहले ग्रामसभा आयोजित होनी चाहिए थी. कृष्णा टोपनो, सुरेश चांपिया, महिला पंचायत समिति सदस्य तारासोय, मोताय सिद्धू, बुधराम लागुरी, गुलयान चांपिया, कपिलेश्वर दोंगो, सादो चांपिया, राजेश पूर्ति, सुधीर कंडूलना, गेबरल चांपिया और अन्य ग्रामीणों ने भी सेंचुरी निर्माण का विरोध किया.

मानकी घाटकुरी सुरेश चांपिया ने मंच से तीर-धनुष उठाकर नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया और सड़कों पर आंदोलन की चेतावनी दी. वक्ताओं ने वन विभाग और खनन कंपनियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं अब भी दूर की बात हैं.

सभा की अध्यक्षता समिति के सदस्य सह मंत्री दीपक बिरुवा ने की. उन्होंने कहा कि सारंडा के ग्रामीणों की भावनाएं, सांस्कृतिक परंपराएं और आजीविका की विधि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखी जाएगी. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करती है और जनता की राय सर्वोपरि है.

मौके पर सांसद जोबा माझी, विधायक सोनाराम सिंकू, विधायक जगत माझी, जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सोरेन, उपायुक्त चंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेणु, सारंडा डीएफओ अभिरूप सिन्हा, मनोहरपुर एसडीओ महेन्द्र छोटन उरांव, एपीआरओ सचिन कुमार, किरीबुरु एसडीपीओ अजय करकेट्टा, गुवा थाना प्रभारी नितीश कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद थे. मौसम की खराबी के कारण मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री चमरा लिंडा, मंत्री संजय प्रसाद यादव और मंत्री दीपिका पांडे सिंह कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके.

झामुमो प्रतिनिधियों में अभिषेक सिंकू, जीतेन महतो, आनंद सिंह, मो. तबारक, चंद्रशेखर दास, जेसाय मार्डी, सोनू सिरका, सोनाराम देवगम, विश्वनाथ बाड़ा, बंदना उरांव, दुर्गा चरण देवगम, मनोज लागुरी, विपिन पूर्ति, कमरान रज़ा, बामिया पूर्ति और मंगल कुम्हार उपस्थित थे.

कार्यक्रम का संचालन खूंटपानी बीडीओ धनंजय पाठक ने किया. सभा के निष्कर्ष में कहा गया कि सारंडा में विकास और अधिकारों के बीच संतुलन आवश्यक है. ग्रामीणों ने एकमत से कहा कि बिना ग्रामसभा की सहमति सेंचुरी निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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