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अच्छे विचारों को स्थापित करने में आध्यात्मिकता का भूमिका अहम : मालती गिलुवा

अच्छे विचारों को स्थापित करने में आध्यात्मिकता का भूमिका अहम : मालती गिलुवा

चक्रधरपुर ,

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय,माउंट आबू (राजस्थान) की चक्रधरपुर इकाई के तत्वावधान में ब्रह्नाकुमारिज की मुख्य प्रशासिका दादी जानकी की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर जनक दिवस कार्यक्रम का आयोजन ब्रह्नाकुमारिज पाठशाला,चक्रधरपुर के थाना रोड स्थित परिसर में किया गया । जिसमें विशेष रूप से जामिद पंचायत की मुखिया मंजुश्री तियु,भाजपा महिला मोर्चा की मालती गिलुवा के अलावा शिक्षिका यशोदा महतो,शिक्षक खिरोद महतो, समाज के शुभचिन्तक सुधीर भाई,वरिष्ठ भाई बीके रामभरत उपस्थित रहे ।

भाजपा के महिला नेत्री मालती गिलुवा ने अपने सम्बोधन में कहा कि समाज मे अच्छे विचारों को स्थापित करने में आध्यात्मिकता का भूमिका अहम है । इसके साथ ही जामिद पंचायत की मुखिया मंजुश्री तियु ने भी कहा कि ईश्वर से कामना है कि वैमनस्यता को भूलकर लोग एक सूत्र में बंध जाय और इसी में ही कल्याण है । जबकि ब्रह्माकुमारीज पाठशाला, चक्रधरपुर की प्रभारी बीके मानिनी ने दादी जानकी के जीवनगाथा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दादी जी बहुत ही सरल व निर्मानचित्त थी । विपरीत परिस्थितियों में भी उनके चेहरे पर कभी सिकन नजर नही आया । उन्होंने कहा कि आज के दिन को जनक दिवस के रूप में मना रहे है । क्योंकि दादी जानकी ने अपने जीवन सम्पूर्ण रूप से प्रभु अर्पण कर दिया था । इसके पूर्व पाठशाला प्रभारी बीके मानिनी के द्वारा परमात्म मुरली का पाठ किया गया तथा परमपिता शिव परमात्मा को बीके राजेश व वीणा प्रदत्त विशेष भोग को स्वीकार कराया गया । ततपश्चात दादीजी के तस्वीर पर सभी ने अपने श्रद्धासुमन अर्पण किए । मौके पर सुशीला,गीता संगीता,लीलावती, सत्यवामा,छाया, कनकलता,आशा, मुख्य रूप से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किए । फिर सभी के बीच भोग बांटा गया । बता दें कि 01 जनवरी 1916 को हैदराबाद में जन्मी दादी जानकी ने अपने जीवन को अपने उम्र के 104 वां पड़ाव तक प्रभु अर्पण करके रखी । ब्रह्नाकुमारिज का पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी जानकी ने 27 मार्च 2020 को माउंट आबू के ग्लोबल अस्पताल में अपना अंतिम सांस ली । दादी का नाम विश्व की सबसे स्थिर मन की महिला का वर्ल्ड रिकार्ड भी है । अमेरिका के टैक्सस मेडिकल एवं साइंस इंस्टिट्यूट में वैज्ञानिकों के द्वारा परीक्षण के बाद दादीजी को मोस्ट स्टेबल माइंड ऑफ़ द वर्ल्ड वूमेन के खिताब से नवाजा गया था ।

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