आदित्यपुर। ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC) झारखंड राज्य कमिटी के तत्वावधान में “मजदूर वर्ग की स्थिति और चुनौतियां” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय श्रमिक प्रशिक्षण शिविर रविवार को आदित्यपुर रेलवे स्टेशन के समीप स्थित रेलवे इंस्टीट्यूट में संपन्न हुआ। 29 अगस्त से शुरू हुए इस शिविर में झारखंड के लगभग सभी जिलों से AIUTUC के सदस्य और मजदूर प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
शिविर का आयोजन 29 अगस्त, शनिवार अपराह्न 3 बजे से 30 अगस्त, रविवार दोपहर 1 बजे तक किया गया। प्रशिक्षण शिविर के दौरान मजदूर वर्ग की वर्तमान स्थिति, कार्यस्थल की समस्याओं, श्रमिक अधिकारों, संगठन विस्तार और वर्ग चेतना के विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मजदूरों ने साझा की कार्यस्थल की समस्याएं
शिविर के पहले सत्र में विभिन्न जिलों से आए मजदूर प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र और कार्यस्थलों में मजदूरों की वर्तमान स्थिति, समस्याओं एवं चुनौतियों को सामने रखा। राज्य कमिटी के सदस्यों ने प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और मजदूरों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने पर जोर दिया।
दूसरे सत्र में मजदूरों की समस्याओं के समाधान और संगठन को मजबूत करने के रास्तों पर चर्चा हुई। विभिन्न कंपनियों एवं कार्यक्षेत्रों से आए मजदूर प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए कई सुझाव दिए।
पूंजीवादी नीतियों और श्रमिक हितों पर शंकर दास गुप्ता का संबोधन
शिविर के अंतिम सत्र को AIUTUC के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी कॉमरेड शंकर दास गुप्ता ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बनाई जा रही कई नीतियों का उद्देश्य मजदूरों के हितों की रक्षा के बजाय पूंजीपतियों के हितों को बढ़ावा देना है।
उन्होंने “Ease of Doing Business” की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार को आसान बनाने के नाम पर श्रमिकों के अधिकारों और हितों को कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 में हुए संशोधनों का उदाहरण देते हुए कहा कि खनिज क्षेत्र में नीलामी व्यवस्था से बड़े पूंजीपतियों को अधिक लाभ मिलने की स्थिति बनी है, जबकि छोटे कारोबारियों के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्होंने इसे पूंजी के केंद्रीकरण की प्रक्रिया से जोड़ते हुए कहा कि अधिक से अधिक पूंजी का कुछ हाथों में केंद्रित होना पूंजीवाद की मूल प्रवृत्ति है।
कॉमरेड शंकर दास गुप्ता ने कहा कि किसी सरकार या राजनीतिक दल की नीतियों को केवल उसके नाम के आधार पर नहीं, बल्कि वर्गीय दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है। उन्होंने मजदूर वर्ग से व्यक्ति विशेष के विरोध तक सीमित न रहकर अपने अधिकारों, परिस्थितियों और संघर्ष को व्यापक वर्ग चेतना के आधार पर समझने का आह्वान किया।
संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं के चरित्र निर्माण पर जोर
उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए नए लोगों को जोड़ने, उन्हें शिक्षित एवं सक्रिय कार्यकर्ता बनाने तथा कार्यकर्ताओं के चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन में पद प्राप्त करना लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि संगठन को मजबूत करना और मजदूरों एवं आम जनता के बीच विश्वास कायम करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के शोषण के खिलाफ संगठित संघर्ष जरूरी है। उन्होंने विभिन्न जन आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यापक और संगठित आंदोलन के दबाव में सरकारों को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करना पड़ा है।
उन्होंने मजदूर हितों के खिलाफ बनाए गए कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही। साथ ही पूरे झारखंड में मजदूरों के बीच वर्ग चेतना, संगठनात्मक चेतना और बेहतर चरित्र निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद
शिविर के दौरान मंच पर कॉमरेड अमर चौधरी, जयसेन मेहर, लिली दास, आशीष कुमार धर, राज्य अध्यक्ष आर. एस. शर्मा एवं सचिव राजीव तिवारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विष्णु देव गिरी, अनिल बावड़ी, आशीष कुमार धर, आसुदेव महतो, दिलीप कुमार, आशीष कुमार घोष, राजू कुमार, नूनीवाला देवी, हाबूलाल महतो, सुभाष प्रमाणिक, जितेंद्र ठाकुर, विशाल कुमार बर्मन, रोहित कुमार, संतोष कुमार, कौशिक घोष समेत कई कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समापन अवसर पर मजदूर वर्ग को संगठित करने, नए मजदूर साथियों को संगठन से जोड़ने तथा पूरे झारखंड में मजदूरों के बीच वर्ग चेतना एवं संगठनात्मक चेतना के विकास के साथ श्रमिक हितों के लिए संघर्ष को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।