New Delhi. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति करते हुए केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया। आर्लेकर ने पिछले साल दो जनवरी को केरलम के राज्यपाल के तौर पर शपथ ली थी। वह इस साल 12 मार्च से तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर केरलम के नए राज्यपाल होंगे। वह आर्लेकर की जगह लेंगे। माथुर को 27 जुलाई, 2024 को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
इसके अलावा, राष्ट्रपति ने चार अन्य राज्यपालों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा के पूर्व सदस्य दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। झारखंड के वरिष्ठ भाजपा नेता ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। झारखंड के पलामू निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के पूर्व सदस्य राम (68), हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे। दिसंबर 2024 में ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किए जाने से पहले कंभमपति मिजोरम के राज्यपाल थे।
विज्ञप्ति के अनुसार, सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल और ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल और ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
यादव भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य हैं। सुषमा स्वराज के बाद इस पद को संभालने वाली वह दूसरी महिला हैं। हरियाणा के महेंद्रगढ़ से लोकसभा की पूर्व सदस्य रहीं यादव, थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री गहलोत 11 जुलाई, 2021 से कर्नाटक के राज्यपाल रहे। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता बिसेन, राज्य के बालाघाट निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व सांसद हैं। वह 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे।
बिसेन, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की जगह लेंगे। सिंह ने 15 सितंबर, 2021 को पदभार संभाला था। बयान में कहा गया है कि ये नियुक्तियां संबंधित राज्यपालों के अपने-अपने पदों का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगी।
चारों नए राज्यपाल गौतम, यादव, बिसेन और राम अनुभवी ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और एससी (अनुसूचित जाति) नेता हैं जिन्हें देश के प्रमुख राज्यों में जमीनी स्तर, चुनावी और विधायी कार्यों का दशकों का अनुभव है।
