New Delhi. जीएसटी परिषद ने बृहस्पतिवार को सुधारों को आगे बढ़ाते हुए कर प्रशासन में व्यापक बदलावों को मंजूरी दी। इसके तहत जीएसटी अधिकारियों की करदाताओं को गिरफ्तार करने का अधिकार समाप्त करने के साथ आपराधिक अभियोजन की सीमा बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही ज्यादातर दावों के लिए तेज ‘रिफंड’ की व्यवस्था की गई है। परिषद ने छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए ई-कॉमर्स मंचों पर पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने को मंजूरी दी है। इसमें जीएसटी पंजीकरण में बदलाव के लिए सरल प्रक्रिया, जुर्माने में कमी और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों के लिए बिल मिलान व्यवस्था की ओर बढ़ने के संबंध में अधिकारियों की एक समिति का गठन शामिल है।
अधिकारियों की यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। समिति ऐसे वास्तविक खरीदार को संरक्षण देने के मुद्दे की जांच करेगी, जिसके पास उचित बिल है, जिसने माल प्राप्त कर लिया है और अपने आपूर्तिकर्ता को पूरा भुगतान कर दिया है।
परिषद ने जीएसटी नोटिस जारी करने के लिए 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा को भी मंजूरी दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत प्रक्रिया संबंधी सुधार भरोसे के सिद्धांत पर आधारित हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सुधार एक्सप्रेस’ का हिस्सा है।
ये सुधार एक अप्रैल, 2027 से लागू किए जाएंगे।
मंत्री ने कहा कि परिषद ने पांच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले और केवल उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने वाले कारोबारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत साल में केवल एक बार रिटर्न दाखिल करना होगा और तिमाही आधार पर कर का भुगतान करना होगा।
इसकी विस्तृत रूपरेखा पर परिषद की अगली बैठक से पहले फैसला किया जाएगा। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के तहत पंजीकृत और कई राज्यों में कारोबार करने वाले करीब दो लाख करदाताओं के लिए केंद्रीकृत आकलन व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल सीजीएसटी क्षेत्राधिकार में करीब 69.5 लाख ऐसे करदाता हैं जो केवल सीजीएसटी के तहत आते हैं। इनमें से करीब दो लाख करदाता एक राज्य के भीतर या अलग-अलग राज्यों में कई सीजीएसटी क्षेत्राधिकार के तहत आते हैं।
