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पीएम सूर्यघर योजना के प्रगति की डीसी ने की समीक्षा, 30 सितंबर तक 1000 आवेदन प्राप्त करने का निर्देश

जमशेदपुर. समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की प्रगति एवं क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. उपायुक्त ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराना है, साथ ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाना है. उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लाभुकों को योजना से जोड़ा जाए.

उपायुक्त द्वारा 30 सितंबर तक 1000 आवेदन प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. उन्होंने निर्देशित किया कि लक्षित वर्ग (आवासीय उपभोक्ता, छोटे एवं मध्यम परिवार) को चिन्हित कर उनसे आवेदन सुनिश्चित कराएं.आवासीय सोसायटी एवं बड़े लाभुक समूहों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाए, ताकि अधिक संख्या में लोग इस योजना का लाभ उठा सकें. लाभुकों को योजना की प्रक्रिया, अनुदान एवं लाभ की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाए. सभी विभागीय पदाधिकारी आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें और मासिक प्रगति की समीक्षा की जाए.

उपायुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का बेहतर क्रियान्वयन जिले में ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक लाभ की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने सभी पदाधिकारियों से अपेक्षा की कि निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य प्राप्त करेंगे. उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने घरों में सोलर पैनल लगाएं और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाते हुए बिजली खर्च में बचत करें. बैठक में जिला योजना पदाधिकारी, विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता समेत संवेदक व अन्य सम्बंधित उपस्थित थे.

उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई स्वास्थ्य संबंधी बैठक, शिशू मातृत्व मृत्यु दर तथा मिर्गी मरीजो के लिए संचालित उल्लास प्रोजेक्ट की हुई समीक्षा शिशू मातृत्व के स्वस्थ्य की नियमित जांच, उपचार तथा गुणवतापूर्ण स्वस्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए

मातृत्व शिशु मृत्यु दर तथा मिर्गी मरीजो के लिए संचालित उल्लास प्रोजेक्ट की समीक्षा 

उपायुक्त ने उल्लास प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में शिशु मातृत्व मृत्यु दर प्रतिवेदन के आधार पर पूर्वी सिंहभूम जिला में वर्ष 2024-25 में मातृत्व मृत्यु दर 70 तथा शिशू मृत्यु दर 9 तथा वर्ष 2025-26 में मातृत्व मृत्यु दर 57 तथा शिशू मृत्यु दर 6 प्रति हजार पायी गई.
उपायुक्त ने वर्ष 2024-25 में मातृत्व शिशु मृत्यु दर की समीक्षा के क्रम में डुमरिया में 1, पटमदा में 3, पोटका में 4, तथा जुगसलाई में 1 मातृत्व मृत्यु के कारणों की विस्तृत जानकारी उपायुक्त द्वारा एमओआईसी के माध्यम की. उन्होंने कहा शिशू मातृत्व के स्वस्थ्य की नियमित जांच, उपचार तथा गुणवतापूर्ण स्वस्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एएनएम, सहिया एम्बुलेंस, चिकित्सकों को अपनी जिम्मेवारी ठीक से निभानी होगी प्रत्येक गर्भवती महिलाओं का रिकॉड, नियमित जॉच, अल्ट्रा साउण्ड की सुविधा आदि के बारे में लोगों को जानकारी दी जाए.

सरकार के द्वारा तीसरे और चौथे .छब् (गर्भावस्था पूर्व देखभाल) विज़िट के दौरान गर्भवती महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा दी जाती है, ताकिः़ भ्रूण का विकास सही हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी की जा सके.़ किसी प्रकार की जटिलता (जैसे भ्रूण की स्थिति, प्लेसेंटा की स्थिति, गर्भ में पानी की मात्रा आदि) का समय रहते पता लगाया जा सके.़ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान कर उचित इलाज कराया जा सके.

यह सुविधा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, जैसे जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दी जाती है. इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल आदि में निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है.इसके अतिरिक्त मिर्गी मरीजो के लिए संचालित उल्लास प्रोजेक्ट के तहत चिन्हित 425 मरीजों के नियमित उपचार, काउन्सलिंग आदि के लिए स्वास्थ्य विभाग को निदेशित किया गया. बैठक में सिविल सर्जन श्री साहिर पाल, सभी एमओआईसी तथा अन्य लोग उपस्थित थे.

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