
जमशेदपुरः झारखंड में घाटशिला विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है. इस सीट पर एक ओर जहां पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और उनके पुत्र बाबूलाल सोरेन की प्रतिष्ठा दांव पर है, वहीं दो बार यहां से चुनाव जीत चुके मंत्री रामदास सोरेन का राजनीतिक भविष्य भी दांव पर लगा है. पांचवे राउंड में बाबूलाल सोरेने तेजी से आगे निकल गये हैं. यहां बावुलाल सोरेन को 21560 जबकि रामदास सोरेन को 20645 वोट मिले हैं. गणना जारी है.
घाटशिला में 75.85 प्रतिशत मतदान
चुनाव आयोग के अनुसार वर्ष 2024 में घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदाताओं की कुल संख्या 2.49 लाख थी, जिसमें से पुरुष मतदाताओं की संख्या 1.22 लाख और महिला मतदाताओं की संख्या 1.26 लाख थी. इस सीट के लिए 13 नवंबर को मतदान में करीब 75.85 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में
घाटशिला विधानसभा सीट के लिए इस बार हो रहे चुनाव में कुल 12 प्रत्याशी मैदान में हैं. इनमें जेएमएम के रामदास सोरेन और बीजेपी के बाबूलाल सोरेन के अलावा भारत आदिवासी पार्टी के इंद्रजीत महतो,पीपीआई की पार्वती हांसदा और एसयूसीआई के दिकु बेसरा समेत चार निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल है.
जेएमएम पार्टी का रहा है दबदबा
पिछले तीन विधानसभा चुनाव में घाटशिला विधानसभा सीट पर जेएमएम का दबदबा रहा है. हालांकि इससे पहले दो बार कांग्रेस और एक बार भाजपा उम्मीदवार को भी जीत मिली. इससे पहले घाटशिला इलाके को वामपंथियों का गढ़ माना जाता था.
प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी
रामदास सोरेनः जेएमएम प्रत्याशी रामदास सोरेन वर्ष 2000 से ही क्षेत्र में सक्रिय है. पहले दो चुनाव में हार मिलने के बाद वर्ष 2009 में उन्हें पहली बार सफलता मिली. लेकिन 2014 के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद 2019 के चुनाव में उन्हें फिर सफलता मिली. वहीं चंपाई सोरेन के जेएमएम छोड़ने के बाद उन्हें मंत्री बनने का अवसर मिला.
बाबूलाल सोरेनः घाटशिला से बीजेपी प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन की पहचान अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन से है. बाबूलाल सोरेन पिछले कई चुनावों से अपने पिता के लिए चुनावी रणनीति को मूर्त रूप देते थे और इस बार खुद चुनाव मैदान में उतरे हैं.
