
Ranchi. दो नक्सलियों को मृत्युदंड पर झारखंड हाइकोर्ट के दो न्यायाधीशों के अलग-अलग विचारों पर न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी ने शुक्रवार को सुनवाई की. न्यायाधीशों ने 2013 में पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक अमरजीत बलिहार सहित छह पुलिसकर्मियों की हत्या के दोषियों की मौत की सजा की पुष्टि से संबंधित एक आपराधिक अपील पर फैसला सुनाया था. न्यायमूर्ति चौधरी प्रवीर मुर्मू उर्फ प्रवीर दा और संतन बास्के उर्फ ताला दा द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई करेंगे, जिन्हें दुमका सत्र न्यायालय ने 26 सितंबर, 2018 को मौत की सजा सुनाई थी.
इससे पहले, झारखंड उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने 2013 में पुलिस दल पर हुए हमले के लिए दो माओवादियों को दी गई मौत की सजा के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई करते हुए खंडित फैसला सुनाया था. इस हमले में पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक अमरजीत बलिहार सहित छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. पीठ ने 17 जुलाई को 197 पृष्ठों का विस्तृत फैसला सुनाया था.
अब इन अपीलों पर न्यायमूर्ति चौधरी सुनवाई करेंगे. इससे पहले मामले में न्यायमूर्ति मुखोपाध्याय ने बरी करने का फैसला सुनाया था जबकि न्यायमूर्ति प्रसाद द्वारा मौत की सजा बरकरार रखी गई थी. न्यायमूर्ति प्रसाद ने राज्य सरकार को एसपी बलिहार के परिवार को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने और उनके बच्चों को पुलिा उपाधीक्षक (डीएसपी) या उप कलेक्टर स्तर की नौकरी देने का भी आदेश दिया था. इसके अतिरिक्त, उन्होंने बलिहार के साथ मारे गए पांच कांस्टेबल के परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने तथा चतुर्थ श्रेणी के पदों पर अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का निर्देश दिया था.
