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Railway: रेगुलर ट्रेनों में लंबी वेटिंग, रिग्रेट की स्थिति, पर खाली जा रही स्पेशल ट्रेनें, यह है वजह

New Delhi. रेल मंत्रालय के त्योहारों में होने वाली भीड़ के मद्देनजर देशभर में विशेष रेलगाड़ियों के 18,000 फेरे चलाए जाने के दावे के बावजूद नियमित रेलगाड़ियों की मांग बहुत अधिक बनी हुई है तथा हालत यह है कि अक्सर प्रतीक्षा सूची तय सीमा से अधिक हो जाती है और टिकट बुकिंग वेबसाइटों पर ‘उपलब्ध नहीं’ है कि स्थिति दिखाई देती है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि रेलगाड़ियों के अपने गंतव्य तक सुरक्षित और समय पर पहुंचने को सुनिश्चित करने के लिए, रेल भवन में एक विशेष ‘वॉर रूम’ बनाया गया है, जिसके जरिए सभी रेलगाड़ियों की बारीकी से निगरानी की जा रही है। रेलवे अधिकारी हालांकि स्वीकार करते हैं कि यात्री विशेष रेलगाड़ियों को पसंद नहीं करते, क्योंकि इनका किराया अधिक होता है, यात्रा में अधिक समय लगता है और समय की पाबंदी भी कम होती है।

भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी)की वेबसाइट से पता चलता है कि लगभग सभी मार्गों पर नियमित रेलगाड़ियों में या तो लंबी प्रतीक्षा सूची है या फिर ‘उपलब्ध नहीं है’ (रिग्रेट)की स्थिति दिख रही है।‘रिग्रेट’का अभिप्राय है कि प्रतीक्षा सूची में यात्रियों की संख्या तय सीमा से अधिक हो गई है। एक अधिकारी ने बताया, ‘अगर आप नयी दिल्ली-पटना मार्ग को देखें, तो त्योहार विशेष रेलगाड़ी संख्या- 04096 में एसी थ्री टिकट का किराया 1,745 रुपये है, जबकि नियमित संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस का किराया 1,390 रुपये है।’’ उन्होंने कहा कि उसी दूरी को तय करने में विशेष ट्रेन को काफी अधिक समय भी लगता है। विशेष रेलगाड़ी को जहां नयी-दिल्ली से पटना के बीच करीब एक हजार किलोमीटर की दूरी तय करने में 22 घंटे 55 मिनट का समय लगता है, वहीं संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस यह सफर 13 घंटे आठ मिनट में पूरा कर लेती है।

अधिकारी ने बताया, यात्रा का समय पहले से अधिक होने के बावजूद विशेष रेलगाड़ियां शायद ही कभी समय पर अपनी मंजिल तक पहुंच पाती हैं, जिसकी वजह से अक्सर 25 से 30 घंटे की थका देने वाली यात्रा करनी पड़ती है।’’ उन्होंने दलील दी कि यही कारण है कि संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस में विशेष रेलगाड़ी की तुलना में प्रतीक्षा सूची काफी लंबी है।

30 प्रतिशत तक अधिक किराया
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,‘आमतौर पर, विशेष रेलगाड़ियों का किराया नियमित रेलगाड़ियों की तुलना में 30 प्रतिशत तक अधिक होता है। इसके अलावा, कुछ मार्गों पर क्षमता की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए, हमें इन रेलगाड़ियों के लिए अलग रास्ते तैयार करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा, ‘यही वजह है कि हमारी पूरी कोशिशों के बावजूद, हम अधिक भीड़भाड़ वाले मार्गों पर विशेष रेलगाड़ियों की समयबद्धता की गारंटी नहीं दे सकते।’

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि रेल मंत्रालय को विशेष रेलगाड़ियों का किराया नियमित रेलगाड़ियों के मुकाबले कम रखने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि इनमें यात्रा का समय अधिक लगता है और इनके पहुंचने का समय भी निश्चित नहीं होता। एक अधिकारी ने सवाल किया,‘मैं एक लंबी और अनिश्चित यात्रा के लिए अधिक पैसे क्यों दूंगा, जबकि मैं एक छोटी, अधिक विश्वसनीय और सस्ती ट्रेन से यात्रा कर सकता हूं?’

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