Ranchi. झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता के शरीर पर संघर्ष या प्रतिरोध के निशान नहीं मिलना मात्र उसकी गवाही को खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। खासकर तब, जब पीड़िता नाबालिग हो और मेडिकल जांच से घटना की पुष्टि होती हो। जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सिमडेगा की विशेष पॉक्सो अदालत के आरोपियों की 20 साल कैद की सजा को बरकरार रखते हुए तीनों आरोपियों की अपील खारिज कर दी। घटना सिमडेगा में वर्ष 2017 में हुई थी।
जलडेगा थाना में इसकी प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी।पीड़िता की उम्र घटना के समय करीब 16 वर्ष थी। वह सुरेश सामद के घर आयोजित एक कार्यक्रम में गई थी। रात करीब 10 बजे वह हाथ-पैर धोने के लिए चापाकल के पास गई। आरोपियों ने उसे पकड़ लिया।
आरोप है कि एक आरोपी उसे जबरन खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया, जबकि अन्य आरोपियों ने उसके हाथ-पैर पकड़ रखे थे। इसके बाद ग्रामीणों के आने के डर से आरोपी उसे धोलपहाड़ी ले गए, जहां उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया गया। आरोपियों ने उसे घटना के बारे में किसी को बताने पर धमकी भी दी। बाद में पीड़िता ने अपनी मां को घटना की जानकारी दी।
