Ranchi. झारखंड हाइकोर्ट ने हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद से प्राप्त शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर सेवा से हटाये गये पारा शिक्षकों को बड़ी राहत दी है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़ी कई रिट याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए पारा शिक्षकों की सेवा जारी रखने और अगस्त 2024 से काम किये गये अवधि का मानदेय/वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया है. अदालत ने संबंधित शिक्षकों की सेवा रोकने से जुड़े आदेशों को रद्द कर दिया. पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने पाया कि हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद के प्रमाण पत्रों को लेकर पहले भी हाइकोर्ट का फैसला आ चुका है.
अपील में पांच जुलाई 2012 को डिवीजन बेंच ने हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से प्राप्त इंटरमीडिएट प्रमाण पत्र को वैध माना था. इस फैसले का अनुपालन भी संबंधित विभाग की ओर से चार सितंबर 2012 को जारी आदेश के माध्यम से किया गया था.
अदालत ने कहा कि झारखंड सहायक अध्यापक सेवाशर्त नियमावली, 2021 लागू होने के बाद पारा शिक्षकों की सेवा शर्तें इसी नियमावली से नियंत्रित होंगी. नियमों में सेवा समाप्ति को बड़ी सजा माना गया है और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है. बिना प्रक्रिया अपनाये काम रोकना और मानदेय बंद करना नियमों के अनुरूप नहीं है.
