जमशेदपुर. मेहरबाई टाटा मेमोरियल अस्पताल (एमटीएमएच) ने मंगलवार को 50 वर्ष का हो गया. इस मौके पर कदमा के कुडी महंती ऑडिटोरियम में कैंसर रोगियों के प्रति इसके अथक प्रयासों और योगदान के सम्मान में एक समारोह का आयोजन किया गया. समारोह के मुख्य अतिथि एमटीएमएच के चेयरमैन डॉ. आर.एन. शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि के रुप में कारपोरेट सर्विसेस के वीपी चाणक्य चौधरी उपस्थित थे. सम्मानित अतिथि के रुप में एमटीएमएच एम्पलाई यूनियन के अध्यक्ष राकेश्वर पांडे सहित कई अन्य गणमान्य अतिथि जिनमें टाटा स्टील के वरिष्ठ प्रबंधन, एमटीएमएच और टीएसडब्ल्यूयू के सदस्य, सम्मानित नागरिक, डॉक्टर, कैंसर से उबरने वाले लोग और एमटीएमएच स्टाफ शामिल थे.

वर्ष 1975 में हुई थी कैंसर अस्पताल की स्थापना एमटीएमएच की स्थापना जमशेदपुर कैंसर सोसाइटी (पूर्व में भारतीय कैंसर सोसाइटी, जमशेदपुर शाखा) द्वारा 1975 में इस क्षेत्र के कैंसर रोगियों के लिए की गई थी. इसे भारत की पहली नारीवादी की प्रतीक लेडी मेहरबाई टाटा के नाम पर रखा गया, जो सर दोराबजी जमशेदजी टाटा की पत्नी थीं. 4 फरवरी 1975 को, जे आर डी टाटा, तत्कालीन चेयरमैन, टाटा संस द्वारा अस्पताल का उद्घाटन किया गया. इस अस्पताल का निर्माण 10 लाख रुपये की राशि से हुआ था जिसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट से 3 लाख रुपये की अनुदान राशि और कई संस्थाओं और व्यक्तियों द्वारा दी गई राशि शामिल थी. इस अस्पताल की डिजाइन आरएन मास्टर, चीफ आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर द्वारा की गई थी.
वर्ष 2018 में, टाटा ट्रस्ट्स के भारत में कैंसर चिकित्सा में क्रांति लाने के दृष्टिकोण के तहत, ट्रस्ट्स ने टाटा स्टील के साथ साझेदारी कर एमटीएमएच को एक समग्र कैंसर केयर सेंटर में बदलने की दिशा में काम किया. इस परियोजना के लिए शिलान्यास 2 मार्च, 2018 को रतन टाटा द्वारा किया गया. सिर्फ एक वर्ष के भीतर, 13 मार्च 2019 को रतन टाटा ने अपग्रेडेड एमटीएमएच का उद्घाटन किया और इसे झारखंड के मरीजों को समर्पित किया. वर्तमान में, एमटीएमएच एक एनएबीएच (एंट्री लेवल) मान्यता प्राप्त अस्पताल है, जिसमें 130 बेड की क्षमता है, एक समर्पित डे केयर सेंटर, नवीनतम रेडिएशन उपकरण और राज्य-स्तरीय डायग्नोस्टिक्स शामिल हैं, जिनमें एक एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला और पीईटी सीटी भी है. प्रीतपाल पॅलियटिव केयर सेंटर (जो सूरी सेवा फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित है) इस क्षेत्र में अपनी तरह का एकमात्र सेंटर है. अनुभवी कंसल्टेंट्स और नर्सिंग स्टाफ मिलकर मरीजों को कैंसर के उपचार के नवीनतम तरीके उपलब्ध कराने में समर्पित हैं.
आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री गंभीर योजना से भी जुड़ा है अस्पताल
यह अस्पताल आयुष्मान भारत योजना और झारखंड मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के तहत भी पैनल में है, जिसके कारण यह बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे रहनेवाले) मरीजों को भी इलाज प्रदान करने में सक्षम है. रतन टाटा का कैंसर चिकित्सा के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट था जब उन्होंने देशभर में कैंसर सुविधाओं की स्थापना की मंजूरी दी थी. किसी भी कैंसर मरीज को इलाज के लिए अपने राज्य से बाहर यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए. यही एमटीएमएच का उद्देश्य है—झारखंड और इसके आसपास के क्षेत्र में किफायती और गुणवत्तापूर्ण कैंसर देखभाल को सभी के लिए सुलभ बनाना.”