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NEET-PG 2024: चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर कुंजी, प्रश्न पत्र सार्वजनिक करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

New Delhi. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह 11 अगस्त को आयोजित ‘नीट-पीजी’ 2024 की उत्तर कुंजी और प्रश्न पत्रों को सार्वजनिक करने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई करेगा, ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके.कुछ छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रही अधिवक्ता तन्वी दुबे ने न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष कहा कि सूचना ज्ञापन प्रकाशित नहीं किया गया और यहां तक कि परीक्षा आयोजित करने के लिए कोई मानक संचालन प्रक्रिया भी नहीं है.

उन्होंने कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर राज्य भी भ्रमित हैं. पीठ ने मामले को नियमित सुनवाई वाले दिन सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता बताई. दुबे के मार्फत से दायर याचिकाओं में से एक में, उत्तर कुंजी और प्रश्नपत्र जारी न करने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) की मनमानी कार्रवाई को चुनौती दी गई है. इसमें आरोप लगाया गया कि अपेक्षित और वास्तविक अंकों में अंतर होने की स्थिति में उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन और पुनर्जांच का कोई विकल्प नहीं था.

शीर्ष अदालत ने पूर्व में एनबीई द्वारा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातकोत्तर (नीट-पीजी) 2024 के पैटर्न में अंतिम समय में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह ‘‘बहुत ही असामान्य’’ है और इससे छात्रों में ‘‘भ्रम’’ पैदा हो सकता है. इसके बाद, उसने याचिकाओं पर एक सप्ताह के भीतर एनबीई और केंद्र से जवाब मांगा था. छात्रों ने कहा कि यह मुद्दा 11 अगस्त को आयोजित नीट-पीजी के परीक्षा पैटर्न, अंकों के सामान्यीकरण, उत्तर कुंजी के खुलासे और प्रश्नपत्रों में अंतिम समय में किए गए बदलाव से संबंधित है. छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहीं वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने कहा कि न तो कोई नियम है और न ही स्पष्टता है और परीक्षा को उसके आयोजन से तीन दिन पहले दो भागों में विभाजित कर दिया गया था. परीक्षा संचालन से जुड़े नियमन की ओर इशारा करते हुए मखीजा ने कहा, ‘‘एक मानकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है.

’ इशिका जैन और अन्य द्वारा दायर एक अन्य याचिका में नीट-पीजी 2024 की उत्तर कुंजी, प्रश्नपत्रों को सार्वजनिक करने और अंकों के मानकीकरण का अनुरोध किया गया था क्योंकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा को दो भागों में विभाजित किया गया था. यह परीक्षा एमबीबीएस और बीडीएस के बाद के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है. एनबीई द्वारा 23 अगस्त को घोषित परिणामों से अप्रत्याशित रूप से कम रैंकिंग को लेकर छात्रों में चिंता पैदा हो गई है.

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