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झारखंड में अब स्किन डॉक्टरों को IADVL में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य, फर्जी डॉक्टरों पर लगेगी लगाम

RANCHI : अब स्किन संबंधी बीमारियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के लिए नए नियम लागू हो गए हैं. इंडियन डर्मेटोलॉजी, वेनेरोलॉजी एंड लेप्रोलॉजिस्ट एसोसिएशन (IADVL) ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि स्किन स्पेशलिस्ट (Skin Specialists) यदि प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो उन्हें अनिवार्य रूप से एसोसिएशन में रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

नए नियम के तहत डॉक्टरों को फॉर्म भरकर आवेदन करना होगा. इसके बाद एसोसिएशन डॉक्टरों के डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करेगी और सही पाए जाने पर उन्हें एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर प्रदान किया जाएगा. यह नंबर डॉक्टरों के लिए प्रिस्क्रिप्शन पर लिखना अनिवार्य होगा. नियम के अनुसार, अब बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के कोई भी डॉक्टर स्किन संबंधी बीमारियों का इलाज नहीं कर सकेगा. इतना ही नहीं स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को अपना नंबर बोर्ड पर भी डिसप्ले करना होगा.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से न केवल मरीजों को फायदा होगा बल्कि फर्जी और अपंजीकृत डॉक्टरों पर भी लगाम लगेगी. हाल के दिनों में रांची और आसपास के क्षेत्रों में बिना डिग्री वाले लोग खुद को स्किन एक्सपर्ट बताकर इलाज करते पाए गए है. इसकी लिस्ट भी एसोसिएशन ने तैयार कर ली है. जिसकी शिकायत विभाग से की जाएगी. ऐसे में IADVL का यह निर्णय मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्वालिटी ट्रीटमेंट उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

क्या है आवेदन की प्रक्रिया

IADVL ने डॉक्टरों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाया है. इच्छुक स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के साथ मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया या स्टेट मेडिकल काउंसिल द्वारा जारी डिग्री और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट संलग्न करना अनिवार्य होगा. वहीं पीजी करने के बाद मेडिकल कॉलेज की डिग्री भी अपलोड करना है. डॉक्यूमेंट्स की जांच के बाद एसोसिएशन द्वारा रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर दिया जाएगा.

कैसे काम करता है एसोसिएशन

IADVL के बारे में स्टेट सेक्रेट्री डॉ राजू कुमार ने बताया कि देशभर में स्किन स्पेशलिस्ट का सबसे बड़ा संगठन है. इसका मुख्य उद्देश्य स्किन डिजीज के इलाज की गुणवत्ता बढ़ाना, डॉक्टरों की क्षमता को बढ़ावा देना और फर्जी प्रैक्टिस को रोकना है. एसोसिएशन का मानना है कि इस कदम से न केवल मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिलेगा बल्कि डॉक्टरों की पहचान भी मजबूत होगी.

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