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SEBI का बड़ा फैसला, बड़े IPO में मिनिमम शेयरहोल्डिंग के नियमों में छूट

नई दिल्ली. बाजार नियामक सेबी की बोर्ड बैठक खत्म हो गई है. इस बैठक में सेबी ने कहा कि 50,000 करोड़ रुपये से एक लाख करोड़ रुपये के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए 25% की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंड को अब मौजूदा तीन वर्षों की तुलना में पांच वर्षों में हासिल किया जा सकता है.

जिन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण ₹1 लाख करोड़ से ₹5 लाख करोड़ के बीच है, उनके लिए सेबी ने न्यूनतम ₹6,250 करोड़ या निर्गम-पश्चात बाजार पूंजीकरण का ₹2.75% तक का सार्वजनिक निर्गम रखने का आह्वान किया है.

5 लाख करोड़ रुपये से अधिक बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों के लिए, सेबी ने न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश का आकार 15,000 करोड़ रुपये या 1% रखने का आह्वान किया है. यदि सूचीबद्धता के दिन सार्वजनिक शेयरधारिता 15% से कम है, तो न्यूनतम 15% शेयरधारिता पांच वर्षों में तथा 25% शेयरधारिता 10 वर्षों में प्राप्त करनी होगी.

यदि सार्वजनिक शेयरधारिता 15% या उससे अधिक है, तो पांच वर्षों में न्यूनतम 25% शेयरधारिता हासिल करनी होगी. जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को आईपीओ एंकर बुक के लिए आरक्षित श्रेणी में शामिल किया जाएगा. आईपीओ में एंकर हिस्से के लिए आरक्षित सीमा आईपीओ आकार के एक तिहाई से बढ़ाकर 40% कर दी गई.

 

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