New Delhi. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि सेमीकंडक्टर भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम होंगे। देश में कुशल प्रतिभाओं, बड़े घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की संभावनाओं को देखते हुए भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026’ में चंद्रशेखरन ने कहा कि 160 साल पुराने टाटा समूह की प्राथमिकता ऐसे उद्योग में अपनी जगह बनाना है, जिसकी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी रूप से आवश्यकता है।
चंद्रशेखरन ने कहा कि कुशल प्रतिभाओं, बड़े घरेलू बाजार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भागीदारी की क्षमता के कारण भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण की क्षमताएं विकसित करने के लिए अनुकूल स्थिति में है। उन्होंने कहा, भारत में हमारे पास बहुत अच्छी स्थिति है क्योंकि हमारे पास प्रतिभाएं हैं, घरेलू बाजार है और हम हर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका निभा सकते हैं।’’
इस क्षेत्र का पूरा परिवेश विकसित करने में साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि जरूरी प्रौद्योगिकियां हासिल करने के लिए भारत को वैश्विक कंपनियों के साथ मिलकर काम करना होगा। साथ ही, ऊर्जा की जरूरतों पर भी करीबी नजर रखनी होगी। उन्होंने कहा, हमें साझेदारी की जरूरत है, क्योंकि हमारे पास सभी प्रौद्योगिकियां हैं… अगर आप इसे डिजाइन करते हैं, तो निश्चित रूप से हम वहां तक पहुंच जाएंगे। हालांकि आपको सावधान भी रहना होगा क्योंकि ऊर्जा पर नजर रखना जरूरी है।’’
टाटा समूह की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (पीएसएमसी) के साथ साझेदारी में गुजरात के धोलेरा में करीब 91,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर चिप विनिर्माण संयंत्र (फैब) स्थापित कर रही है। टाटा समूह के भविष्य को लेकर ‘बोर्डरूम’ में जारी खींचतान के बीच हाल में चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में तीसरा, पांच साल का कार्यकाल दिया गया था।
वैश्विक कारोबारी माहौल में अनिश्चितताओं को स्वीकार करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनियां निवेश से जुड़ी हर बात के पहले से अनुमानित होने की उम्मीद नहीं कर सकतीं।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन बहुत-सी चीजें निश्चित हैं। ऊर्जा की जरूरत निश्चित है, काम करने का तरीका निश्चित है और उसे लागू करने की क्षमता निश्चित है। केवल यह तय करना है कि आप उत्पादन कितना बढ़ाते हैं, कितनी तेजी से बढ़ाते हैं और किस प्रौद्योगिकी को अपनाते हैं…।’’
