
Jamshedpur. Tata Steel पर फिलहाल चीन से सस्ते स्टील आयात का दबाव है. प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है. लाभ में कमी आयी है. तीसरे तिमाही के जारी आंकड़े सबकुछ बयां करते हैं. प्रबंधन कम मुनाफे को लेकर खर्च घटा रहा है. इसका असर कर्मचारियों पर भी हो रहा है. प्रबंधन का फोकस खर्च में कटौती है. इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
Tata Steel के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने भी पिछले दिनों एक कार्यक्रम में चीन से सस्ते स्टील आयात पर चिंता जतायी थी और सरकार से घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि चीन की अनुचित प्रतिस्पर्धा से वैश्विक स्टील कंपनियां प्रभावित हो रही हैं . चीन के आक्रामक मूल्य निर्धारण से ग्लोबल स्टील प्लेयर्स लाभ कमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि भारत में इस धातु की मांग और खपत बढ़ रही है. पिछले दो साल इस्पात उद्योग के लिए वैश्विक स्तर पर मुश्किलों भरे रहे हैं.
इस्पात मार्जिन कम होने के साथ लाभ कमाने के लिए भी लगातार संघर्ष कर रही टाटा स्टील में खर्च की कटौती पर फोकस है. साथ ही, स्थायी नेचर के कर्मचारियों की संख्या कम करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. Tata Steel ने हाल ही में टिनप्लेट, तार कंपनी समेत कई कंपनियों का समायोजन किया है. ऐसा करने से कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या कम ऐसे में वहां के कर्मचारियों और अधिकारियों का बेहतर इस्तेमाल किया जा रहा है.
इस वजह से कर्मचारियों की संख्या घटायी जा रही है. कंपनियों में इएसएस लाया जा चुका है. टिनप्लेट में भी इएसएस लाने की योजना है. इसके अलावा Tata Steel से जुड़ी सभी कंपनियों में संख्या घटाने की मुहिम चल रही है. फिलहाल टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में करीब 11,000 कर्मचारी हैं. इसे करीब 8500 तक पर लेकर जाने की योजना है. कम से कम 3000 कर्मचरियों को एक प्रक्रिया के तहत कम करने की योजना है.
दरअसल, स्टील उद्योग में इन दिनों सुस्ती है. टाटा स्टील, जेएसडब्लू और आर्सेलर मित्तल जैसी बड़ी कंपनियों ने भी अपने उत्पादन में कटौती की है. स्टील के उत्पादन में लगी तमाम कंपनियां इस स्लोडाउन से उबरने का रास्ता तलाश रही हैं. चीन के सस्ते आयातित स्टील की वजह से स्टील कंपनियों की डिमांड घट गई है और मुनाफा लगातार गिरता जा रहा है.
