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Uniform Civil Code: उत्तराखंड में धर्म और लिंग से परे सभी नागरिकों पर अब यूसीसी लागू, सिर्फ अनुसूचित जनजाति के लोग इसके दायरे से बाहर रहेंगे, जानें संहिता की खास बातें

Dehradun. उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रिमोट के माध्यम से अधिसूचना जारी कर सोमवार को सूबे में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दी. मौके पर सीएम ने कहा कि यह केवल उत्तराखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक दिन है. इसका पूरा श्रेय राज्य की जनता को देते हुए सीएम ने कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक क्षण है कि उन्होंने 2022 में जनता से जो वायदा किया था, उसे वह पूरा कर रहे हैं. उन्होंने यूसीसी तैयार करने में उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति व प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह सहित अधिनियम की नियमावली बनाने वाली समिति का आभार जताया. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया.

यूसीसी की खास बातें

लागू करने का अधिकारयूसीसी लागू करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में एसडीएम रजिस्ट्रार और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे. नगर पंचायत-नगर पालिकाओं में संबंधित एसडीएम रजिस्ट्रार और कार्यकारी अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे. इन सबके लिए भी कर्तव्य तय किये गये हैं.
सिर्फ अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर उत्तराखंड के सभी निवासियों (सूबे में रहने वाले व बाहर रह रहे) पर यह लागू होगा. 26 मार्च 2010 से संहिता लागू होने की तिथि बीच हुए विवाह का पंजीकरण अगले छह महीने में करवाना होगा. यूसीसी लागू होने के बाद होने वाले विवाह का पंजीकरण विवाह तिथि से 60 दिन के भीतर कराना होगा. यूसीसी में ये प्रावधान किया गया कि विवाह तभी होगा जबकि पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और स्त्री की न्यूनतम आयु 18 वर्ष हो. कोई भी व्यक्ति जो विवाह होने के बाद जानबूझकर पंजीकरण नहीं कराएगा या उपेक्षा करेगा, उस पर 10 हजार का जुर्माना लग सकता है. जो व्यक्ति पंजीकरण में गलत तथ्य प्रस्तुत करेगा, उसे तीन माह की जेल और 25 हजार का जुर्माना या दोनों लग सकते हैं. जो सब रजिस्ट्रार पंजीकरण प्रक्रिया, विच्छेद पर 15 दिन के भीतर एक्शन नहीं लेगा, उस पर भी 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है. यदि सब रजिस्ट्रार- रजिस्ट्रार समय पर कार्रवाई नहीं करता है तो ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है. सब रजिस्ट्रार के अस्वीकृति आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार के पास अपील की जा सकती है. रजिस्ट्रार के अस्वीकृति आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के पास अपील की जा सकती है. अपीलें ऑनलाइन पोर्टल या ऐप के माध्यम से दायर हो सकेंगी.

लिव इन संबंधों के लिए भी नियम

लिव इन संबंधों के लिए नियम : यूसीसी लागू होने से पहले से स्थापित लिव इन संबंधों का, संहिता लागू होने की तिथि से एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जबकि यूसीसी लागू होने के बाद स्थापित लिव इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन, लिव इन में प्रवेश की तिथि से एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. दोनों या कोई एक साथी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीके से लिव इन समाप्त करने कर सकते हैं. यदि एक ही साथी आवेदन करता है तो रजिस्ट्रार दूसरे की पुष्टि के आधार पर ही इसे स्वीकार करेगा. यदि लिव इन से महिला गर्भवती हो जाती है तो रजिस्ट्रार को अनिवार्य तौर पर सूचना देनी होगी. बच्चे के जन्म के 30 दिन के भीतर इसे अपडेट करना होगा.

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