


Jamshedpur. एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) की संभावना को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने शनिवार को स्थिति की समीक्षा के बाद सभी डीसी, सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और जिला सर्विलांस पदाधिकारियों को सतत निगरानी और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने संदिग्धों की समय पर पहचान, जांच, उपचार, निगरानी और जरूरत पर तत्काल रेफरल की व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। गंभीर श्वसन संक्रमण मामलों की निगरानी व रिपोर्टिंग प्रभावी बनाने का निर्देश देते हुए स्थिति पर नजर रखने को कहा है।देश के विभिन्न राज्यों में इन्फ्लूएंजा-ए एच1एन1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन को सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक ने निर्देश जारी किया है। इधर, एमजीएम और सदर अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड भी तैयार कर लिए गए हैं।
विभाग के निर्देश में बताया गया है कि इन्फ्लूएंजा-ए एच1एन1 और एच3एन2 सीजनल इन्फ्लूएंजा की तरह होता है। यह वायरस जनवरी से मार्च के बीच सक्रिय होता है। साथ ही मानसून के बाद के मौसम में भी संक्रमण की संभावना रहती है। जिला सर्विलांस इकाई को निर्देश दिया गया है कि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से समन्वय स्थापित करें। संभावित और संक्रमित मरीजों की प्रयोगशाला जांच कराएं और संक्रमण की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी करें। मरीजों की स्क्रीनिंग जिला अस्पताल, सीएचसी और मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में की जाए। इनमें सर्दी, खांसी, बुखार, नाक से पानी आना, गले में खराश, जुकाम, सिरदर्द, उल्टी, सुस्ती, डायरिया और ठंड लगना जैसे लक्षण वाले मरीज शामिल हैं।
सांस लेने में परेशानी और संक्रमण के लक्षण वाले मरीजों की भी विशेष निगरानी करने को कहा गया है। इस दौरान सभी संबंधित चिकित्सक और पैरामेडिकल कर्मी मास्क का उपयोग करेंगे। इन्फ्लूएंजा-ए एच1एन1 की जांच की सुविधा रिम्स, रांची और एमजीएम, जमशेदपुर में उपलब्ध है।
इसके लिए मेडिकल कॉलेज और सदर अस्पताल में 10-10 बेड के आइसोलेशन वार्ड चिन्हित करना सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही आवश्यक दवाओं, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर आदि की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है। ऐसे मामलों की सूचना एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) को देने को कहा गया है।

