
Chaibasa. झारखंड सरकार सारंडा को वन्य प्राणी अभ्यारण्य घोषित करने के प्रस्ताव पर ग्रामीणों की राय जानने पश्चिमी सिंहभूम के छोटानागरा पहुंची. यहां मचानगुटू मैदान में आयोजित इस आमसभा में हजारों ग्रामीणों ने भाग लिया और प्रस्ताव का विरोध किया. ग्रामीणों ने कहा कि हमारा जीवन सारंडा जंगल पर निर्भर है. इसे वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित किया, तो पाबंदियां लगेंगी. इनसे हमारी आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी. इसके बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार स्थानीय लोगों की राय और हित में ही निर्णय लेगी. डीएफओ अभिरूप सिन्हा ने कहा कि ग्रामीणों की राय पर अंतिम रिपोर्ट बनेगी.
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक मर्यादा का पालन करना जानती है और जनता की भावनाओं के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, जो भी निर्णय होगा, वह जनता की राय और संविधान के दायरे में होगा. सारंडा डीएफओ अभिरूप सिन्हा ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी राय ही अंतिम रिपोर्ट का आधार बनेगी और किसी भी योजना को जबरन लागू नहीं किया जाएगा.
ग्रामीणों ने उठाये कई सवाल
ग्रामीणों ने सैंक्चुरी बनने पर विस्थापन, पुनर्वास और लाभ की योजनाओं पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि खदानें, जंगल और नदी-नाले तो गांवों को बर्बाद कर रही हैं, लेकिन स्थानीय को रोजगार नहीं मिल रहा. कई ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार का दबाव बताया. सैंक्चुरी के पक्ष में तर्क दिए गए कि इससे वन्य प्राणियों का संरक्षण होगा, जैव विविधता बचेगी और ईको-टूरिज्म से नए रोजगार की संभावनाएं खुलेंगी।वहीं विरोध करने वालों का कहना था कि इससे पारंपरिक अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे, खेती, मवेशी चराई और वनोपज पर रोक लग सकती है। सभा में दर्जनों गांवों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे.
आमसभा में ये थे शामिल
इस दौरान मंत्री दीपक बिरुवा, चमरा लिंडा, संजय प्रसाद यादव और दीपिका पांडेय सिंह भी मंच पर मौजूद रहीं। इसके अलावा, सांसद जोबा माझी, विधायक सोनाराम सिंकू, निरल पूर्ति, सुखराम उरांव, जगत माझी और जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सोरेन भी उपस्थित थीं. उपायुक्त चंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने सभा में सुरक्षा और कानून व्यवस्था का जायजा लिया.