
- रायपुर जेल में आलीशान जिंदगी जी रहा था अमन, जेल प्रबंधन का दावा सोशल मीडिया में वायरल फोटो जेल की नहीं
- अमन को अलग से किसी तरह की कोई सुविधा नहीं दी गई थी. उसे सामान्य कैदियों की तरह ही रखा गया था.
रांची. झारखंड में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर अमन साव की जेल के भीतर से फोटो सोशल मीडिया पर आई. इसके बाद डीआईजी एसएस तिग्गा जांच के लिए रायपुर केंद्रीय जेल पहुंचे. उस बैरक में भी गए जहां अमन बंद था. वहां के प्रहरियों से पूछताछ की गई. जेल प्रबंधन का दावा है कि सोशल मीडिया में फोटो वायरल हुई है. वह रायपुर जेल की नहीं है. अमन को अलग से किसी तरह की कोई सुविधा नहीं दी गई थी. उसे सामान्य कैदियों की तरह ही रखा गया था.
चर्चा है कि जेल के भीतर से अमन वर्चुअल नंबर(ई-सिम वाले मोबाइल फोन) से अपने गुर्गों से बातचीत करता था. जेल में बंद महिला बंदी पम्मी की मदद से ये नंबर अमन तक पहुंचा था. कुछ संदिग्ध नंबर भी मिलने की चर्चा है. इस बीच, झारखंड पुलिस ने पुलिस हिरासत से भागने के दौरान मारे गए अमन पर एक और केस दर्ज कराया है. यह केस पलामू के चैनपुर थाने में एटीएस के इंस्पेक्टर पीके सिंह के बयान पर दर्ज हुआ है. एफआईआर में बताया गया है कि पुलिस की गाड़ी पुलिसवालों के साथ कुख्यात अमन बैठा हुआ था.
उस वाहन पर जब अपराधियों ने हमला किया और अमन पुलिस की इंसास छीनकर भागा तो इस दौरान पुलिस ने बचाव के लिए 38 राउंड फायरिंग की. इसी फायरिंग में अमन गंभीर रूप से जख्मी हो गया और मारा गया. एफआईआर में अमन समेत अज्ञात के विरुद्ध 21 तरह की धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस के अनुसार अमन को पहले चेतावनी दी गई कि रुक जाओ. पर वह नहीं माना. इस घटना में हवलदार राकेश कुमार के दाहिने जांघ में गोली लग गई.
पुलिस का दावा- घटना में अमन के गुर्गे भी घायल
पुलिस ने दर्ज प्राथमिकी में दावा किया है कि इस घटना अमन साव के गुर्गे भी घायल हुए हैं. जो घने जंगल का फायदा उठाकर भाग निकले. अमन के शव से कुछ दूरी पर दो बम मिले. इसके अलावा कई तरह की गोलियों के खोखे भी मिले. पुलिस का मानना है कि अमन के 6 से 7 गुर्गों ने पुलिस टीम पर हमला किया.
गैंगस्टर के वकील बोले- शक था एनकाउंटर होगा
रायपुर में गैंगस्टर अमन का केस देख रहे वकील अमित बनर्जी का कहना है कि उन्हें पहले से ही पता था कि अमन का एनकाउंटर किया जाएगा. इसलिए कोर्ट में आवेदन लगाकर शिफ्टिंग के समय की वीडियोग्राफी की मांग की गई थी. कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि अमन को प्लेन या ट्रेन से रांची ले जाया जाए. कोर्ट ने झारखंड पुलिस से पूछा था कि आप ट्रेन से क्यों नहीं आते हैं. इस पर पुलिस ने सुरक्षा को लेकर गोलमोल जवाब दिया था. हमारे पास सबूत हैं कि प्री प्लान करने के बाद ही एनकाउंटर किया गया है. अमन के परिवार वाले चाहेंगे तो इस मामले की सीबीआई जांच की मांग जरूर करेंगे.
