
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राशन कार्ड लोकप्रियता का कार्ड बन गया है. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि क्या राशन कार्ड का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच पाता है. कोर्ट ने कहा कि जब राज्य सरकारों से विकास के बारे में पूछा जाता है तो वे कहते हैं कि उनके राज्य में प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है. साथ ही वे कहते हैं कि 75 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे है. आखिर इन तथ्यों में सामंजस्य कैसे हो सकता है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं अंजलि भारद्वाज और हर्ष मांदर की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि लोगों की आमदनी में काफी बड़ा फर्क है. कुछ लोग हैं जिनकी आमदनी बाकी आबादी की तुलना में काफी ज्यादा है और प्रति व्यक्ति आय पूरे राज्य की आमदनी के औसत के आधार पर तय किया जाता है. अमीर और अमीर होते जा रहे हैं और गरीब गरीब ही रह जा रहे हैं. प्रशांत भूषण ने कहा कि ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड प्रवासी मजदूरों को मुफ्त में अनाज देने की जरूरत है जिनकी संख्या करीब आठ करोड़ है.
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 81 करोड़ 35 लाख लोगों को मुफ्त में अनाज दे रही है और दूसरी योजना के तहत 11 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है.
पहले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि उन राज्य सरकारों को राशन जारी करें जिन्होंने प्रवासी मजदूरों का वेरिफिकेशन कर लिया है. सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कहा था कि प्रवासी मजदूरों को राशन कार्ड जारी नहीं किया जा रहा है और उनसे ये कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार ने उनके लिए अतिरिक्त राशन का आवंटन नहीं किया है.
