
Ranchi. झारखंड में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को आरोप लगाया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने पेसा अधिनियम 1996 की मूल भावना को कमजोर किया है, क्योंकि कानून में ‘ग्राम सभाओं’ की सटीक परिभाषा को अधिसूचित नियमों में ‘किनारे कर दिया गया है।’’ विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर ‘‘खनन माफिया और धर्मांतरण सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने’’ के लिए पेसा अधिनियम की मूल भावना के साथ ‘छेड़छाड़’ करने का आरोप लगाया, जिसे सत्ताधारी झामुमो ने खारिज कर दिया।
मरांडी ने भी यह आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार ने पेसा को लागू करने के लिए जिस तरह से ‘इसकी मूल भावना के साथ छेड़छाड़ की है, वह साफ दिखाता है कि यह सब खनन माफिया और धर्मांतरण सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने के मकसद से किया गया है’।
उन्होंने कहा कि ‘चोर चोरी से जाए, लेकिन हेराफेरी से नहीं’ – यह कहावत झारखंड में पेसा कानून के संदर्भ में बिल्कुल फिट बैठती है। आदिवासियों की भावनाओं के साथ खेलना झामुमो, कांग्रेस और राजद की प्रवृत्ति रही है। मरांडी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘झामुमो ने कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर झारखंड आंदोलन की मूल भावना से समझौता किया, और अब, पेसा कानून में अव्यावहारिक प्रावधान जोड़कर, इसने एक बार फिर आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘शिबू सोरेन से लेकर हेमंत सोरेन तक, उन्होंने हमेशा सत्ता और राजनीतिक स्वार्थ के लिए आदिवासी हितों का बलिदान दिया है।’’ उन्होंने कहा, भाजपा किसी भी हालत में आदिवासी समाज के साथ किए गए इस अन्याय और धोखे को बर्दाश्त नहीं करेगी।
