


Ranchi. संताल-परगना में घुसपैठ को लेकर केंद्र सरकार की ओर से दाखिल किये गये शपथ पत्र का जिक्र करते हुए झामुमो के महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा का बयान आया है कि डेमोग्राफी चेंज हो गया. जबकि 50 वर्षों में तो रांची समेत पूरे हिंदुस्तान का चेंज हो गया है. भट्टाचार्य झामुमो कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत सरकार की तरफ से या आधार की जो अथॉरिटी है, उसकी तरफ से कहीं गयी बात में इसका जिक्र नहीं है कि बांग्लादेश से कुछ लोग संताल परगना के इलाके में आकर रह रहे हैं. शपथ पत्र में 2011 की जनगणना को एक आधार बनाया गया. उसमें 1961 को बेसलाइन माना गया है, मतलब 50 साल का समय. भट्टाचार्य ने कहा कि मैं रांची के बहुत पुराने वाशिंदे, जिनकी उम्र 97-98 वर्ष की है, से बात कर रहा था. तब उन्होंने कहा कि 1952 से जब एचइसी का निर्माण होना शुरू हुआ, तब से लोग रांची आने लगे. उस वक्त रांची में पूरे जिले की आबादी तीन लाख से भी कम थी और आज रांची शहर की आबादी 35 लाख से ज्यादा है. उस वक्त मूलत: रांची में आदिवासी सबसे बड़ी कम्युनिटी थी और उसके बाद बंगाली थे. लेकिन आज की स्थिति ऐसी है कि बंगाली कम्युनिटी कई कारण से दूसरी सबसे बड़ी कम्युनिटी नहीं है. ये डेमोग्राफी चेंज इन 50 वर्षों में पूरे हिंदुस्तान का हुआ है. जब देश आजाद हुआ था, तब 33 करोड़ लोग थे. आज 150 करोड़ है. ये 75 साल का आंकड़ा है. अब भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है. चूंकि चुनाव सामने आ रहा है भाजपा के पास मुद्दा नहीं रह गया. इसलिए सांप्रदायिक डेमोग्राफी की बात कर रहे हैं.
सुप्रियो ने कहा कि आप आदिवासी लिखते हैं, तो बताइएगा ना वो सरना है या गैर सरना. ईसाई को अलग से इंडिकेट कर दिया. क्या वो आदिवासी से अलग हो गये. केंद्र सरकार मजाक बना कर रखी है. एनआरसी की बात शपथ पत्र में आता है. उनके सांसद संताल परगना को तोड़ने की बात कहता है. ये खेल हमलोग समझते हैं. ये बहुत खतरनाक खेल है. मैं हाइकोर्ट से विनती करता हूं कि आप इसमें स्वतः संज्ञान लें. कोर्ट की शर्तें पार्टी दफ्तरों में ना लिखी जाये.



