


पटना. राष्ट्रीय उच्च पथ के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे का भुगतान अब बाजार मूल्य के आधार पर होगा. अब तक इसके लिए खतियान में दर्ज जमीन की किस्म को आधार बनाया जाता था. इस संदर्भ में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने रविवार को सभी प्रमंडलीय आयुक्तों एवं जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है.
उन्होंने कहा कि भूमि का वर्गीकरण खतियान में दर्ज किस्म के आधार पर किया जाता रहा है. लगभग 100 वर्ष पुराने खतियान में दर्ज भूमि किस्म एवं भूमि की वर्तमान उपयोगिता में भारी अंतर के कारण रैयतों की आपत्ति और राष्ट्रीय उच्च पथ प्राधिकरण के साथ विवाद उत्पन्न होते रहे हैं.
इस संदर्भ में महाधिवक्ता की राय ली गई. उन्होंने एनएच एक्ट, 1956 की धारा 3जी तथा भू-अर्जन अधिनियम, 2013 की धारा 26 से 30 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि मुआवजे की दर तय करने में खतियान पर निर्भरता उचित नहीं है. भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य ही आधार होना चाहिए. निबंधन विभाग से पूर्व में ही नए सिरे से जमीन के न्यूनतम मूल्य का आग्रह किया गया है.



