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Budget Session: संसद का बजट सत्र कल से, इससे पहले सर्वदलीय बैठक में विधायी एजेंडे पर हुई चर्चा, कांग्रेस बोली- विदेश नीति, अमेरिकी टैरिफ, रुपये में गिरावट और मनरेगा का मुद्द उठाएंगे

New Delhi. संसद के बजट सत्र के शुरू होने से एक दिन पहले मंगलवार को सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें दोनों सदनों के विधायी कार्यों और विभिन्न विषयों को लेकर चर्चा की गई। इस बैठक में सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू शामिल हुए। कांग्रेस के जयराम रमेश, कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव, द्रमुक के टी आर बालू और कई अन्य दलों के नेताओं ने बैठक में भाग लिया। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर दो अप्रैल तक चलेगा। केंद्रीय बजट एक फरवरी (रविवार) को पेश किया जाएगा। बजट सत्र का पहला चरण बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण और आम बजट पेश करेंगी। संसदीय परिपाटी के मुताबिक, इस बार भी बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। इस बार एक फरवरी रविवार को है। सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर चर्चा होगी और उसे पारित किया जाएगा। इसी चरण में केंद्रीय बजट पर भी चर्चा होगी।इसके बाद सदन की बैठक दोबारा नौ मार्च को शुरू होगी और इस दूसरे चरण की समाप्ति के लिए दो अप्रैल की तारीख निर्धारित की गई है।

कांग्रेस ने यह बताया
कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि बुधवार को शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में मोदी सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी शुल्क, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट, मनरेगा को खत्म किए जाने और जनहित के कई अन्य विषयों को उठाया जाएगा। सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार संविधान से मिले अधिकारों को खत्म कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष विदेश नीति का विषय भी उठाएगा। हमारी विदेश नीति कहां पहुंच गई? कोई हमारे साथ खड़ा नहीं है। हमें यह भी नहीं पता चल रहा है कि किसके साथ चलें, कौन हमारे साथ चलेगा। उनका कहना था कि सरकार की आर्थिक नीति की बात करें तो रुपया सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा का मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस योजना से सिर्फ महात्मा गांधी का नाम ही नहीं हटाया गया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार खत्म किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, ‘वोट चोरी’ और बेरोजगारी के विषय को इस सत्र के दौरान उठाया जाएगा।

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