आदित्यपुर । सेंट्रल पब्लिक स्कूल के जूनियर विंग में भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन जूनियर विंग की समन्वयक डेज़ी रानी चौहान के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लेकर विद्यालय परिसर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।
भक्ति गीतों और जयघोष से गूंजा विद्यालय परिसर
रथ यात्रा समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने भगवान जगन्नाथ की स्तुति में भजन प्रस्तुत किए और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। बच्चों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में भाग लेते हुए भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था का परिचय दिया।
विद्यालय प्रशासन ने इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को रथ यात्रा के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी दी।
विद्यार्थियों को दिए भारतीय संस्कृति के संस्कार
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का महत्व बताते हुए भक्ति, प्रेम, एकता, सहयोग और सामाजिक सौहार्द जैसे जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को समझाया कि भारतीय पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं।
विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी रहा।
शिक्षिकाओं के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
इस आयोजन को सफल बनाने में मनोरमा महापात्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके साथ जूनियर विंग की सभी शिक्षिकाओं ने समर्पण और उत्साह के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया। उनके प्रयासों से यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और यादगार बन गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य, प्रबंधन समिति, शिक्षकों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए समन्वयक एवं सभी शिक्षिकाओं के प्रयासों की प्रशंसा की।
भगवान जगन्नाथ से सुख-समृद्धि की प्रार्थना
कार्यक्रम का समापन भगवान श्री जगन्नाथ से सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की प्रार्थना के साथ हुआ। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के साथ हो सके।