Site icon Lahar Chakra

Chaibasa Iron Mine’s: पश्चिमी सिंहभूम जिले की बंद खदान पर मरांडी ने उठाये सवाल, सरकार के ढुलमुल रवैये को ठहराया जिम्मेदार, DMFT Fund पर भी घेरा

Chaibasa. झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण खनिज ब्लॉक की नीलामी प्रभावित हुई है, जिससे बेरोजगारी और पलायन बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि 2019-20 से देशभर में 434 खनिज ब्लॉक की नीलामी हुई है, जिनमें से केवल तीन झारखंड में हैं। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, 2019-20 से देशभर में 434 खनिज ब्लॉक की नीलामी हुई है। इनमें से 45 ब्लॉक ओडिशा में, 41 छत्तीसगढ़ में और केवल तीन झारखंड में हैं। इतनी कम संख्या प्रशासनिक विफलता को दिखाती है। इससे उत्पादन, रोजगार और राजस्व पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, 2018-19 से 2024-25 के बीच ओडिशा में लौह अयस्क का उत्पादन 12 करोड़ टन से बढ़कर 18 करोड़ टन हो गया, जबकि झारखंड का उत्पादन 2.3 करोड़ टन पर ही रुका रहा।

यह खनन प्रबंधन और नीतियों की विफलता को दर्शाता है।” मरांडी ने दावा किया कि राजस्व जुटाने के मामले में भी झारखंड पीछे रह गया है। उन्होंने कहा, देश के 40 प्रतिशत खनिज संसाधन होने के बावजूद, वर्ष 2025-26 में झारखंड का खनन राजस्व 22,000 करोड़ रुपये रहा, जबकि केवल 17 प्रतिशत खनिज संसाधन वाले ओडिशा ने 46,000 करोड़ रुपये कमाए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “खनिज संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद, नीतिगत कमियों, प्रशासनिक लापरवाही और पारदर्शिता की कमी के कारण झारखंड अपनी क्षमता के अनुसार आगे नहीं बढ़ पाया है।

पश्चिमी सिंहभूम जिले की बंद खदान पर उठाये सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हाल ही में झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र का दौरा किया था और वहां की स्थिति चिंताजनक है। मरांडी ने कहा, कई खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं क्योंकि पट्टा (की अवधि) खत्म होने के बाद उनका न तो नवीनीकरण किया गया और न ही दोबारा नीलामी हुई। इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ा है, युवाओं में पलायन बढ़ा है और स्थानीय अर्थव्यवस्था ठहर गई है।

उन्होंने डीएमएफटी निधि के इस्तेमाल में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 2016 से 2026 के बीच पश्चिमी सिंहभूम में लगभग 3,700 करोड़ रुपये जमा हुए, लेकिन कोई वार्षिक रिपोर्ट, बजट या परियोजनाओं का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। वेबसाइट आखिरी बार 2018 में अद्यतन की गई थी, जिससे स्थानीय निवासी अपने अधिकारों से वंचित रह गए हैं।

Exit mobile version