


चाईबासा. झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा वन क्षेत्र को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वन्यजीव आश्रयणी घोषित करने की तैयारी शुरू हो गई है. राज्य सरकार ने मंत्रियों का समूह गठित कर स्थानीय लोगों से राय लेने की प्रक्रिया शुरू की है.
यह समूह मंगलवार को सारंडा का दौरा करेगा. खनन विभाग के अनुसार प्रस्तावित आश्रयणी क्षेत्र में आने वाले लगभग 4,710 हेक्टेयर के लौह अयस्क खदानों को बंद करना पड़ेगा, जिससे राज्य को करीब 13.22 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का संभावित नुकसान होगा.
तेज कर दिया है. वे 30 सितंबर को छोटानागरा फुटबाल मैदान में सुबह 10 बजे से आमसभा करेंगे.
इस आमसभा में क्षेत्र के हजारों ग्रामीण जुटेंगे. आयोजकों ने ग्रामीणों से पारंपरिक हथियार और पहनावे के साथ शामिल होने की अपील की है. स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सारंडा को सेंचुरी घोषित किया गया, तो यहां के मूल निवासियों का जीवन संकट में पड़ जाएगा. सभा का मकसद यह संदेश देना है कि सारंडा के लोग जल, जंगल और जमीन के सवाल पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे.
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि सरकार को कोई भी निर्णय लेने से पहले स्थानीय लोगों की भावनाओं और अधिकारों का सम्मान करना चाहिए. सभा में 56 गांवों के मुण्डा-मानकी और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे. इनमें लागुड़ा देवगम (मानकी), बामिया मांझी (पूर्व जिला परिषद सदस्य), जेना वाडिंग, दुला चाम्पिया, सोहन मांझी, लालसय चाम्पिया, सुनिल बारला, लेबेया सिदू, सिताराम मांझी, मोहन देवगम, ओड़ेया पुरती, रामो सिदू, मोटाये सिदू, कुदा चाम्पिया, मांगता सुरीन, अमर सिंह सिदू, बुधराम सुरीन, मंगल देवगम, लालू बेसरा, लखन चाम्पिया, टुकुई हांसदा, सुखनात बाहंदा समेत कई स्थानीय नेता और बुद्धिजीवी उपस्थित रहेंगे.
सभा में जोबा माझी, सांसद, चाईबासा लोकसभा, दीपक बिरूवा, मंत्री, झारखंड सरकार, जगत माझी, विधायक, मनोहरपुर, सोनाराम सिंकू, विधायक, जगन्नाथपुर, निरल पुरती, विधायक, माझगांव, दशरथ गगराई, विधायक, खरसावां, सुखराम उरांव, विधायक, चक्रधरपुर को बुलाया गया है.



