
New Delhi. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (एनएलयू) के संघ को निर्देश दिया कि वह अंकपत्रों में संशोधन करे और क्लैट स्नातक-2025 के चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची चार सप्ताह के भीतर पुनः प्रकाशित करे. मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने अभ्यर्थियों की कुछ आपत्तियों को स्वीकार कर लिया, जबकि कुछ को खारिज कर दिया. पीठ ने कहा, ‘‘हम प्रतिवादी/संघ को मार्कशीट (अंकपत्र) को संशोधित करने और चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची को चार सप्ताह के भीतर पुनः प्रकाशित/पुनः अधिसूचित करने का निर्देश देते हैं.
पीठ ने स्पष्ट किया कि संघ को प्रत्येक अपीलकर्ता और याचिकाकर्ता तथा उन अभ्यर्थियों पर मूल्यांकन लागू करना चाहिए, जिन्होंने अदालत के विचाराधीन कुछ प्रश्नों का प्रयास किया हो. अदालत ने कहा कि संघ को उन सभी अभ्यर्थियों पर भी मूल्यांकन लागू करना चाहिए जिन्हें विश्लेषण के आधार पर कुछ लाभ दिए जा सकते हैं.
इसके परिणामस्वरूप, पीठ ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) स्नातक-2025 प्रश्नावली में कुछ त्रुटियों की ओर इशारा करने वाली याचिकाओं और अपीलों का निस्तारण कर दिया। एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए अभ्यर्थियों और संघ द्वारा अपील दायर की गई थी. अदालत ने दिसंबर 2024 में परीक्षा में उपस्थित हुए याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय संघ (सीएनएलयू) के वकीलों की दलीलों पर नौ अप्रैल को सुनवाई पूरी कर ली थी तथा अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.
उच्च न्यायालय ने उन प्रश्नों पर दलीलें सुनीं, जिन्हें याचिकाओं में चुनौती दी गई है. क्लैट स्नातकोत्तर-2025 में कुछ प्रश्नों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अभी सुनवाई होनी है. क्लैट के जरिये देश के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर विधि पाठ्यक्रमों में प्रवेश निर्धारित होता है. विभिन्न उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं दायर कर आरोप लगाया गया कि परीक्षा में कई प्रश्न गलत थे.
उच्चतम न्यायालय ने छह फरवरी को इस मुद्दे पर सभी याचिकाओं को ‘सुसंगत निर्णय’ के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दिया था. शीर्ष अदालत ने सीएनएलयू की स्थानांतरण याचिकाओं पर यह निर्देश पारित किया.
एनएलयू में पांच वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक दिसंबर को क्लैट, 2025 का आयोजन किया गया था और परिणाम सात दिसंबर, 2024 को घोषित किए गए थे. कई छात्र चाहते थे कि मामले को दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया जाए, क्योंकि उनका कहना था कि उसने क्लैट-यूजी 2025 परीक्षा के दो प्रश्नों में त्रुटियों की पहचान करके और संघ को अपने परिणामों को संशोधित करने का निर्देश देकर कुछ याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश पारित किया है. बीच दिसंबर, 2024 को दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने उत्तर कुंजी में त्रुटियों को लेकर कंसोर्टियम को क्लैट-2025 के परिणाम को संशोधित करने का निर्देश दिया था.
