New Delhi. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बाल शोषण और दुष्कर्म के मामलों से निपटने के लिए ‘फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों’ को मजबूत करने वाली एक केंद्रीय योजना को जारी रखने की मंजूरी दी और साथ ही इनकी संख्या 779 से बढ़ाकर 850 करने का निर्णय लिया। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर दो अक्टूबर 2019 को शुरू की गई यह योजना, वर्तमान में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। इस योजना की शुरुआत के बाद से, इन विशेष अदालतों ने दुष्कर्म और बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत आने वाले अपराधों से जुड़े 4.02 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है।
इस योजना को अब मार्च 2031 तक, पांच साल की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया है।
मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसलों के बारे में पत्रकारों को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मोदी सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों से सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मौजूदा कानूनों का पूरी तरह से उपयोग और कार्यान्वयन करने, तथा ऐसे मामलों से निपटने के लिए नए कानून तैयार करने के प्रयासों का हिस्सा है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “दुष्कर्म और पॉक्सो के मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए, 3,788.04 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ यह योजना लागू की जाएगी। मामलों के निपटारे में कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए, प्रत्येक अदालत में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।”
