Jamshedpur. घाटशिला उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है. मतदान 11 नवंबर को होगा. वोटों की गिनती 14 नवंबर को है. उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान शुक्रवार को राजनीतिक हलचल तेज रही. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. नामांकन के दौरान भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबू लाल मरांडी व आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो मौजूद रहे. साथ में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे.

घाटशिला सीट पर उपचुनाव रामदास के निधन के कारण कराया जा रहा है. वहीं, भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन का दांव भी अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की विरासत पर टिका है. आठ बार विधायक रह चुके चंपई ने झामुमो से दशकों पुराना नाता तोड़कर पिछले साल भाजपा का दामन थाम लिया था.
बाबूलाल सोरेन के ये हैं मुद्दे
बाबूलाल सोरेन लगातार दूसरी बार घाटशिला से चुनाव लड़ रहे हैं. 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्हें रामदास सोरेन ने लगभग 22,000 मतों से हराया था. हालांकि, इस बार वह घाटशिला के विकास के लिए अपने पिता की ओर से चलाए गए आंदोलन को ढाल बनाकर मैदान में उतरे हैं. बाबूलाल ने से कहा कि संथाल परगना से घाटशिला तक बांग्लादेशी घुसपैठिये आदिवासियों की जमीन और सरकारी व वन भूमि पर कब्जा कर रहे हैं. वे हमारी बहनों से विवाह कर सामाजिक व्यवस्था को खराब कर रहे हैं.
यह चुनाव बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर सरकार की तुष्टीकरण नीति के खिलाफ एक लड़ाई है. उन्होंने दावा किया कि जनता का हेमंत सोरेन सरकार से भरोसा उठ गया है. बाबूलाल ने कहा कि सरकार ने रांची के नगड़ी इलाके में आदिवासियों और किसानों की जमीन बिना अधिग्रहण के छीनने की कोशिश की थी. मेरे पिता (चंपई सोरेन) ने इसके खिलाफ आंदोलन शुरू किया और उन्हें जनता का जो समर्थन मिल रहा है, वह दिखाता है कि लोगों का विश्वास इस सरकार से उठ चुका है.
उन्होंने कहा, क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी सुविधाओं की भारी कमी है. युवाओं को रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना मेरी प्राथमिकता होगी. भाजपा नेता ने दावा किया कि “युवाओं, किसानों और आदिवासियों के खिलाफ काम करने वाली इस भ्रष्ट सरकार के प्रति जनता में व्यापक असंतोष है और घाटशिला की जनता उपचुनाव में इसका जवाब देगी.