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Ghatsila By Election: हेमंत सोरेन के ‘बैल’ वाले बयान पर भावुक हुए चंपाई सोरेन, व्यक्तिगत अपमान बता फफक-फफक कर रोये, झामुमो के संघर्ष को लेकर CM को खूब सुनाया

Ghatsila. घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के लिए रविवार शाम चुनाव प्रचार का शोर थम गया. घाटशिला उपचुनाव के प्रचार के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन के पक्ष में एनडीए के कई नेताओं ने दम लगाया. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन भावुक हो गए.

उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी परिवार को बैल कहना बेहद अपमानजनक है. उन्होंने कहा कि ये टिप्पणी झामुमो सरकार की आदिवासी विरोधी मानसिकता को उजागर करती है. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार बताए कि उसने अब तक आदिवासियों, किसानों और मजदूरों के हित में क्या ठोस कदम उठाए हैं? उन्होंने यह भी जोड़ा कि हेमंत सोरेन का बैल वाला बयान न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि पूरे झारखंड आंदोलन के सम्मान पर चोट है. मैंने झारखंड के लिए संघर्ष किया, जेल गया, लेकिन कभी खुद को किसी जाति या परिवार तक सीमित नहीं रखा.

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का अपमान करने वालों को जनता उप चुनाव में करारा जवाब देगी. हम आंदोलन से निकले नेता हैं. जंगलों में रातें गुजारीं. हमारा घर मिट्टी का था, बच्चे चटाई पर सोये. आज सत्ता के नशे में चूर कुछ लोग झारखंड आंदोलन के सिपाहियों का अपमान कर रहे हैं. हमने अपनी मेहनत से झामुमो को सींचा और बढ़ाया. मुख्यमंत्री रहते हुए जब मेरे खिलाफ साजिश रची गयी, तब मैंने चुप्पी साध ली. जिस दिन मुझे अपमानित किया गया, उस दिन मेरी आंखों से आंसू निकल आये. जीवन में कभी नहीं रोया, लेकिन उस दिन दिल टूट गया. मुख्य सचिव को आदेश दिया गया कि चंपाई सोरेन का कार्यक्रम होल्ड कर दो. उस दिन मैंने कहा था मैं थोपा हुआ नेता नहीं हूं, मैं आंदोलन से उपजा हूं. उसी दिन से मैंने नया अध्याय शुरू किया.

आदिवासी, मूलवासी, दलित व मजदूर विरोधी है राज्य सरकार
पूर्व सीएम ने कहा कि झारखंड सरकार आदिवासियों, मूलवासियों और दलितों को ठगने का काम किया है. नगड़ी में आदिवासियों पर लाठीचार्ज कराया गया. चाईबासा में महिलाओं को जेल भेज दिया गया. सरकार को विकास से नहीं, अवैध खनन से मतलब है. मंईयां योजना में काफी महिलाओं के आवेदन रद्द कर दिये गये. 174 मुस्लिम परिवारों को चुना गया, जो घाटशिला के रहने वाले नहीं है.

आदिवासी परिवारों को योजनाओं से वंचित किया जा रहा है. माटियाबांदी में 4,143 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाये गये. इनके माता-पिता तक का पता नहीं है. सरकार कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए है. मौके पर मंडल मुर्मू, अभय सिंह, चंडीचरण साव, लखन मार्डी, अशोक बड़ाइक, सुजन मन्ना आदि उपस्थित थे.

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