
New Delhi. भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में मजबूत घरेलू मांग के सहारे 6.4-6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने बृहस्पतिवार को यह संभावना जताई. सीआईआई के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के बाद मेमानी ने अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की एक सरल त्रिस्तरीय कर संरचना की वकालत की.
उन्होंने कहा कि जरूरी वस्तुओं को पांच प्रतिशत कर के दायरे में रखा जा सकता है जबकि विलासिता एवं नुकसानदेह उत्पादों पर 28 प्रतिशत कर लगाया जाए और शेष वस्तुओं को 12-18 प्रतिशत कर दायरे में रखा जाए. फिलहाल जीएसटी एक चार-स्तरीय कर व्यवस्था है जिसमें पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है.
मेमानी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में कहा कि अच्छे मानसून का अनुमान और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) एवं रेपो दर में कटौती से बढ़ी हुई तरलता जैसे कारक देश की आर्थिक वृद्धि का समर्थन करेंगे.
पेट्रोलियम, बिजली पर जीएसटी लगाने पर भी बोले
उन्होंने पेट्रोलियम, बिजली, अचल संपत्ति और शराब को जीएसटी के दायरे में लाए जाने पर एक राष्ट्रीय सहमति बनाने की वकालत की. मेमानी ने कहा कि अगर भारत को उपलब्ध अवसरों का फायदा उठाना है तो उसे अधिक आर्थिक सुधार करने होंगे और कृत्रिम मेधा (एआई) की दौड़ जीतने के अलावा रोजगार पर उसके संभावित प्रभाव से भी निपटना होगा. उन्होंने कहा कि भारत को अधिक रोजगार पैदा करने वाले विनिर्माण को बढावा देने और कारोबारी सुगमता पर लगातार ध्यान देना होगा.
