
New Delhi. राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय संसदीय प्रणाली को संवाद, चर्चा और असहमति की पुरानी परंपरा से ताकत मिलती है और ये मूल्य एक सच्चे लोकतंत्र के लिए जरूरी हैं। वह यहां पुराने संसद भवन (संविधान सदन) के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल देशों की संसद के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (सीएसपीओसी) को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारत में हजारों सालों से प्रतिनिधि और विचार-विमर्श करने वाली संस्थाएं मौजूद हैं और फल-फूल रही हैं। हरिवंश ने कहा कि दुनिया के अनेक देशों से प्रतिनिधियों की मौजूदगी भारत की इस सोच को दर्शाती है कि दुनिया एक परिवार है। उन्होंने कहा कि यह बैठक आने वाली चुनौतियों का मिलकर सामना करने और सर्वश्रेष्ठ उपायों को साझा करने का अवसर देती है। हरिवंश ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे विधायिका की गरिमा बनाए रखें, कार्यवाही में निष्पक्षता सुनिश्चित करें तथा लोकतांत्रिक नियमों की रक्षा करें।
