
New Delhi. झारखंड के गोड्डा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर एक विवादित बयान दिया है. दुबे ने आरोप लगाया कि देश में जो भी गृह युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं, उसके लिए सुप्रीम कोर्ट और खासतौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जिम्मेदार हैं.
उन्होंने उच्चतम न्यायालय पर निशाना साधते हुए कहा कि कानून यदि शीर्ष अदालत ही बनाएगा तो संसद भवन को बंद कर देना चाहिए. दुबे ने ‘एक्स’ पर यह पोस्ट बिना किसी व्याख्या के लिखा है. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वक्फ (संशोधन) अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में सुनवाई चल रही है. अधिनियम को इस महीने की शुरूआत में संसद ने पारित किया था.
न्यायालय द्वारा इस कानून के कुछ विवादास्पद प्रावधानों पर सवाल उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने अगली सुनवाई तक उन्हें लागू न करने पर सहमति व्यक्त की है.
राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल में समयसीमा निर्धारित किये जाने पर भी बहस शुरू हो गई है. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शीर्ष अदालत के इस निर्णय से असहमति जताई है.वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने शीर्ष अदालत के उक्त निर्देश के साथ-साथ वक्फ (संशोधन) अधिनियम मामले में उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही की सराहना की है. उनके इस बयान को लेकर विपक्ष ने जहां भाजपा पर निशाना साधा है, वहीं भाजपा ने खुद को इस बयान से अलग कर लिया है
भाजपा ने टिप्पणियों से खुद को अलग किया
भाजपा ने शनिवार को अपने सांसदों निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा द्वारा उच्चतम न्यायालय और भारत के प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना पर की गई तीखी टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया. पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने इन टिप्पणियों को सांसदों के निजी विचार बताकर खारिज कर दिया. नड्डा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘भाजपा का उसके सांसदों निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा की न्यायपालिका और प्रधान न्यायाधीश पर की गई टिप्पणियों से कोई लेना-देना नहीं है. ये उनकी निजी टिप्पणियां हैं, लेकिन भाजपा न तो उनसे सहमत है और न ही ऐसी टिप्पणियों का कभी समर्थन करती है. भाजपा इन्हें पूरी तरह से खारिज करती है. नड्डा ने यह भी कहा कि उन्होंने दोनों नेताओं और अन्य लोगों को ऐसी टिप्पणियां न करने का निर्देश दिया है.
उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा न्यायपालिका का सम्मान किया है और उसके सुझावों एवं आदेशों को सहर्ष स्वीकार किया है क्योंकि एक दल के तौर पर उसका मानना है कि शीर्ष अदालत समेत सभी अदालतें लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं.
