
London. भारत और ब्रिटेन ने बृहस्पतिवार को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलने, 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर शुल्क श्रेणियां खत्म होने, हजारों रोजगार के सृजन और ब्रिटिश व्हिस्की, कार एवं कई अन्य वस्तुओं पर शुल्क घटाने का रास्ता साफ होगा. आधिकारिक तौर पर ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (सीईटीए) नाम वाले इस मुक्त व्यापार समझौते पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने हस्ताक्षर किए. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर भी मौजूद थे. इससे पहले स्टार्मर ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के परंपरागत ग्रामीण आवास ‘चेकर्स’ में प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. इस मौके पर स्टार्मर ने भारतीय प्रधानमंत्री का अभिवादन करते हुए कहा, ‘‘मैं इस समझौते को दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक दिन मानता हूं. यह एक-दूसरे से की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का दिन भी है.’’
प्रधानमंत्री मोदी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिटेन एवं भारत ‘स्वाभाविक साझेदार’ हैं और दोनों देश अपने इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस व्यापार समझौते के बाद भारतीय वस्त्र, जूते, रत्न एवं आभूषण, समुद्री खाद्य और इंजीनियरिंग वस्तुओं को ब्रिटेन में बेहतर बाज़ार मिलेगा और कृषि उत्पादों एवं प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग को वृद्धि के नए अवसर मिलेंगे.
मोदी ने कहा, ‘यह समझौता भारत के युवाओं, किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा. दूसरी ओर, ब्रिटेन में बने चिकित्सा उपकरण और वैमानिकी उपकरण जैसे उत्पाद भारत के लोगों एवं उद्योगों तक किफायती एवं आकर्षक कीमत पर पहुंच सकेंगे.’’ उन्होंने बताया कि दोनों देश एफटीए के साथ ‘दोहरे अंशदान समझौते’ (डीसीसी) पर भी आम सहमति पर पहुंचे हैं.
इससे दोनों देशों के सेवा क्षेत्रों, खासकर प्रौद्योगिकी और वित्त, में नई ऊर्जा का संचार होगा. प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन-भारत संबंधों के लिए क्रिकेट की शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कभी-कभी गेंद पर बल्ला चलाने में चूक हो सकती है, लेकिन हम सीधे बल्ले से खेलने और बड़े स्कोर वाली ठोस साझेदारी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. व्यापार समझौते पर दस्तखत होने के कुछ देर पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस समझौते से समूचे ब्रिटेन में हजारों रोजगार पैदा होंगे, कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे और वृद्धि को रफ्तार मिलेगी.
