
New Delhi. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की करीब एक दशक तक बागडोर संभालने वाले इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन का शुक्रवार को बेंगलुरु में निधन हो गया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. परिवार के सूत्रों ने बताया कि वह 84 वर्ष के थे और उनके परिवार में दो बेटे हैं. पिछले कुछ महीने से वह वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे. अधिकारियों ने बताया कि आज सुबह बेंगलुरु स्थित उनके आवास पर के. कस्तूरीरंगन का निधन हो गया.
अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को 27 अप्रैल को रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) में रखा जाएगा.’’ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कस्तूरीरंगन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘यह जानकर दुख हुआ कि डॉ. कृष्णस्वामी कस्तूरीरंगन अब नहीं रहे. इसरो के प्रमुख के रूप में उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कस्तूरीरंगन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत की वैज्ञानिक और शैक्षिक यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डॉ. के. कस्तूरीरंगन के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है.
उनके दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा.’ प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का मसौदा तैयार करने में डॉ. कस्तूरीरंगन के प्रयासों तथा शिक्षा को अधिक समग्र एवं दूरदर्शी बनाने की उनकी कोशिशों को लेकर राष्ट्र हमेशा उनका आभारी रहेगा. कस्तूरीरंगन भारत के पहले दो प्रायोगिक भू अवलोकन उपग्रहों — भास्कर 1 और 2 के लिए परियोजना निदेशक थे. बाद में, उपयोग में लाये गए पहले भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह, आईआरएस-1 ए को समग्र दिशानिर्देश देने की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई. उन्हें पद्म श्री (1982), पद्म भूषण (1992) और पद्म विभूषण (2000) से सम्मानित किया गया.
