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Jamshedpur: निखार सबलोक हत्याकांड के आरोपी अशोक राघव एमजीएम की मेडिकल जांच में स्वस्थ, भर्ती से इनकार के बाद भेजा गया सरायकेला जेल, फर्जी रेफरल पर डीसी सख्त, 3 सदस्यीय टीम करेगी जांच

Jamshedpur.चर्चित युवा होटल कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता अशोक सिंह राघव का बीमारी का ड्रामा बेनकाब हो गया है। जेल से बाहर रहकर अस्पताल में वक्त काटने की उसकी कोशिश नाकाम हो गई। सरायकेला मंडल कारा में बंद राघव को जेल डॉक्टर ने बीमार बताकर पहले सदर अस्पताल और फिर वहां से जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर कराया था। एमजीएम के सीनियर डॉक्टरों की मेडिकल जांच में राघव पूरी तरह स्वस्थ निकला। डॉक्टरों ने उसे भर्ती रखने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद उसे

वापस सरायकेला जेल भेज दिया गया।
बिना किसी बीमारी के कैदी को रेफर करने के इस खेल पर सरायकेला- खरसावां के डीसी नीतीश कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित कर दी है। टीम को 5 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।

अब प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू होगी: सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त नितीश कुमार सिंह ने मामले की पूरी प्रक्रिया की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच का मुख्य फोकस यह रहेगा कि आरोपी को अलग-अलग अस्पतालों में भेजने का निर्णय किन चिकित्सकीय आधारों पर लिया गया और इस दौरान तय नियमों का पालन हुआ या नहीं।

अशोक राघव को 12 सितंबर से सरायकेला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मेडिकल बोर्ड ने बेहतर जांच और इलाज के लिए उसे एमजीएम अस्पताल रेफर करने की अनुशंसा की। इसके बाद आरोपी को जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल लाया गया। एमजीएम में चिकित्सकों ने उसकी जांच की। जांच के बाद डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती रखकर इलाज जारी रखने की आवश्यकता नहीं बताई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर वापस सरायकेला जेल भेज दिया।

रेफरल के आधार पर उठे सवाल
प्रशासनिक जांच में अब यह देखा जाएगा कि सरायकेला सदर अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने एमजीएम रेफर करने की अनुशंसा किन परिस्थितियों में की थी। साथ ही एमजीएम में जांच के बाद भर्ती की जरूरत नहीं होने की चिकित्सकीय राय का भी परीक्षण किया जाएगा। जेल चिकित्सक की भूमिका और मेडिकल रेफरल का आधार भी जांच के महत्वपूर्ण बिंदु होंगे। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि आरोपी को अस्पताल में रखने और फिर रेफर करने की पूरी प्रक्रिया निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुरूप थी या नहीं।

गिरफ्तारी के बाद TMH भी भेजा गया था
मामले में गिरफ्तारी के बाद अशोक राघव को चांडिल थाना पुलिस ने एमजीएम अस्पताल के बजाय सीधे टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) भेजा था। वहां कई दिनों तक इलाज चलने के बाद उसे सरायकेला जेल भेजा गया था। इसके बाद आरोपी को सरायकेला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा के बाद उसे एमजीएम भेजा गया। एमजीएम में जांच के बाद अस्पताल में भर्ती की जरूरत नहीं बताई गई और उसे फिर जेल भेज दिया गया।

अब पूरी प्रक्रिया की होगी समीक्षा
निखार सबलोक हत्याकांड की पुलिस जांच के बीच आरोपी के इलाज और बार-बार अस्पताल रेफर किए जाने की प्रक्रिया अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गई है। उपायुक्त के निर्देश के बाद संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, रेफरल की प्रक्रिया और चिकित्सकीय राय की समीक्षा की जाएगी।

जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपी को अस्पताल भेजने के फैसले के पीछे क्या चिकित्सकीय आधार था और पूरी प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी हुई या नहीं।

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