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Jamshedpur: 48वें ईएमएसआई अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का राज्यपाल ने किया उदघाटन, बोले-समाज की समस्याओं के समाधान केंद्र बनें विश्वविद्यालय व कॉलेज

Jamshedpur. जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज द्वारा आयोजित 48वें इनवायरमेंटल म्यूटाजेन सोसाइटी ऑफ इंडिया (ईएमएसआई) की वार्षिक बैठक व अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन गुरुवार को एक्सएलआरआई में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया. कॉलेज स्थापना के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने पर सभी गदगद हैं. राज्यपाल ने कहा कि औद्योगीकरण व शहरीकरण से प्रदूषण बढ़ रहा है, जो मानव स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है. आनुवांशिक बदलाव, डीएनए की प्रकृति व उसके पर्यावरण प्रभाव पर केंद्रित यह सेमिनार अत्यंत उपयोगी है.

इससे निकले निष्कर्ष मानव कल्याण में सहायक होंगे. उन्होंने जोर दिया कि विश्वविद्यालय व कॉलेज समाज की समस्याओं के समाधान केंद्र बनें. विकसित भारत के लिए स्वस्थ समाज व स्वच्छ पर्यावरण जरूरी है. उद्घाटन सत्र में प्राचार्य डॉ. अमर कुमार सिंह ने स्वागत भाषण दिया. ईएमएसआई अध्यक्ष वाणी प्रिया गांगुली ने संस्था गतिविधियों पर प्रकाश डाला. कोल्हान विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने कहा कि सेमिनार पर्यावरण, जैव विविधता, डीएनए, कैंसर थेरेपी, डायबिटीज व कृषि समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण साबित होगा.

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
इधर, एक्सएलआरआई ऑडिटोरियम में 48वीं वार्षिक बैठक एवं तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया. एनवायरनमेंटल म्यूटाजेनेसिस एंड एपिजेनोमिक्स इन रिलेशन टू ह्यूमन हेल्थ” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में देश-विदेश से वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं. पारंपरिक स्वागत के साथ अतिथियों का अभिनंदन किया गया. राज्यपाल ने संबोधन में कहा कि पर्यावरणीय बदलाव और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर गंभीर शोध जरूरी है. उन्होंने जोर देकर कहा, बढ़ते प्रदूषण, औद्योगिक विस्तार और बदलती जीवनशैली का प्रभाव स्वास्थ्य पर स्पष्ट है.

वैज्ञानिक अनुसंधान समाज को सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं.” उन्होंने शोधकर्ताओं से अपील की कि शोध को प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के हित में उपयोगी बनाएं. झारखंड जैसे औद्योगिक राज्य में पर्यावरण-स्वास्थ्य संतुलन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई. कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने पर्यावरणीय म्यूटाजेनेसिस और एपिजेनोमिक्स पर विचार-विमर्श किया. तीन दिनों तक तकनीकी सत्र, शोध पत्र प्रस्तुतियां और पैनल चर्चाएं आयोजित होंगी.

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