
Jamshedpur. पूर्वी सिंहभूम जिले के जुगसलाई तोरोप, थाड़ दिशोम क्षेत्र के पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों—माझी परगना महाल की अगुवाई में मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित जमशेदपुर नगर निगम विस्तारीकरण योजना को निरस्त करना, झारखंड राज्य में पेसा कानून को अविलंब लागू करना और आदिवासियों के लिए ‘सारना धर्म कोड’ को मान्यता दिलाना था. प्रदर्शन के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम के माध्यम महामहिम राष्ट्रपति, माननीय राज्यपाल (झारखंड), केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री (झारखंड सरकार) और अध्यक्ष, जनजाति आयोग (नई दिल्ली) को संबोधित ज्ञापन सौंपा. पूर्वी सिंहभूम जिला पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243ZC के तहत नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत का गठन असंवैधानिक है.
ऐसे में प्रस्तावित नगर निगम विस्तार योजना को तुरंत रद्द करने की मांग की गई. झारखंड में अब तक पेसा कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया है, जिससे बाहरी लोग पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में बसते जा रहे हैं. इससे आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है और जल-जंगल-जमीन की लूट जारी है.
आदिवासी समुदाय ने मांग की कि सारना धर्म को जनगणना प्रपत्र में स्वतंत्र धर्म कोड के रूप में मान्यता दी जाए. 2011 की जनगणना में करीब 50 लाख लोगों ने सारना धर्म को अपनी पहचान के रूप में दर्ज किया था. वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आदिवासी किसी भी संप्रदाय—हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई—से नहीं जुड़े हैं, वे प्रकृति पूजक हैं. माझी परगना महाल के प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर सरकार ने मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आदिवासी समाज व्यापक आंदोलन करेगा.
