जमशेदपुर: दिव्यांगजनों को सरकारी सेवाएं, अधिकार और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखंड सरकार की ओर से बिरसा मुंडा टाउन हॉल, सिदगोड़ा में मोबाइल कोर्ट सह जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिव्यांगजनों से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई, त्वरित निष्पादन, सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा सहायक उपकरणों का वितरण किया गया।
शिविर में राज्य नि:शक्तता आयुक्त कीर्ति श्री, उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान, विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO), CSR पार्टनर, टाटा स्टील फाउंडेशन के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में दिव्यांगजन और उनके परिजन शामिल हुए।
एक ही मंच पर मिली कई सरकारी सेवाएं
शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा सूचना एवं सेवा स्टॉल लगाए गए, जहां दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र, UDID (Unique Disability ID) कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, कानूनी सहायता तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 से संबंधित विस्तृत जानकारी और परामर्श उपलब्ध कराया गया।इसके साथ ही पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सहायक उपकरणों का वितरण भी किया गया, जिससे उनके दैनिक जीवन को अधिक सुगम और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
‘सरकारी सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता’
राज्य नि:शक्तता आयुक्त कीर्ति श्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्त कर सभी आवश्यक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि UDID कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, पेंशन, सहायक उपकरण और अन्य योजनाओं का लाभ एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को कौशल विकास, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
जिले में चलेगा व्यापक जागरूकता अभियान
उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता प्रत्येक पात्र दिव्यांगजन तक सरकारी योजनाओं और अधिकारों की समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता दी गई है और प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक इसकी जानकारी पहुंचाना आवश्यक है।
इसके लिए जिले में जागरूकता वाहन संचालित कर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे।
समावेशी समाज और बैरियर-फ्री वातावरण पर जोर
कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। वहीं टाटा स्टील फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने दिव्यांगजनों के लिए चलाए जा रहे आजीविका और कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।
उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाने, बैरियर-फ्री (सुगम) वातावरण, समावेशी सोच तथा शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं तक दिव्यांगजनों की समान पहुंच सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।