
जमशेदपुर |
केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले उद्योग जगत की ओर से अहम सुझाव सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में RSB Global के वाइस चेयरमैन और Confederation of Indian Industry (पूर्वी क्षेत्र) के पूर्व अध्यक्ष श्री एस. के. बेहरा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए बड़े और साहसी सुधारों की जरूरत पर जोर दिया है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भर भारत पर जोर
एस. के. बेहरा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी टैरिफ और अन्य बाहरी दबावों के बीच भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ठोस और दूरदर्शी फैसले लेने होंगे। उनका मानना है कि आने वाला बजट केवल संतुलन साधने वाला नहीं, बल्कि विकास को तेज करने वाला होना चाहिए।
विनिर्माण और आत्मनिर्भरता ही विकास की कुंजी
औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखने के लिए आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता है।
उन्होंने ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर टैक्स छूट और ऑटो पार्ट्स के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की वकालत की। साथ ही, पीएलआई (PLI) योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर भी बल दिया।
इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन का नया रोडमैप
सीआईआई के प्रस्तावों का समर्थन करते हुए श्री बेहरा ने 150 लाख करोड़ रुपये के नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) 2.0 की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि तेज़ कार्यान्वयन, स्पष्ट नीतियां और प्रभावी विवाद समाधान तंत्र से निजी निवेश को आकर्षित किया जा सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने एआई, रोबोटिक्स और क्लीन एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों में 10 उन्नत शिक्षण और शोध केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया।
क्षेत्रवार प्रमुख मांगें
श्री बेहरा ने विभिन्न क्षेत्रों की प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया।
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रक्षा क्षेत्र: स्वदेशी खरीद और निजी निवेश के लिए उच्च बजटीय आवंटन, ताकि 2030 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
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लॉजिस्टिक्स: मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों के लिए 30–40 प्रतिशत सब्सिडी और ‘नेशनल लॉजिस्टिक्स सिंगल विंडो’ की स्थापना।
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सस्ती आवास: रियल एस्टेट सेक्टर के लिए टैक्स हॉलीडे (80-IBA) की बहाली और मध्यम वर्ग के लिए ब्याज सब्सिडी (CLSS) का विस्तार।
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डिजिटल संप्रभुता: डेटा सेंटरों को “संप्रभु क्षेत्र” का दर्जा, जिससे आत्मनिर्भर एआई इकोसिस्टम विकसित हो सके।
समावेशी और टिकाऊ विकास का विजन
उन्होंने कहा कि बजट को केवल उद्योग तक सीमित न रखकर स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं में भी निवेश बढ़ाना चाहिए। उनके अनुसार, लक्षित कैपेक्स और सुधारों के माध्यम से ही भारत एक आत्मनिर्भर आर्थिक पावरहाउस बन सकता है।
