
Jamshedpur बागबेड़ा महानगर विकास समिति ने बागबेड़ा क्षेत्र की लंबित जलापूर्ति योजनाओं को लेकर बुधवार को एक बार फिर आवाज उठाई है. समिति ने पूर्वी सिंहभूम के सांसद विद्युत वरण महतो से आग्रह किया है कि वे बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना और बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना के अधूरे निर्माण कार्यों में झारखंड सरकार की लापरवाही का मुद्दा लोकसभा में उठाएं.
समिति की ओर से यह भी मांग की गई है कि बागबेड़ा को नगर परिषद का दर्जा दिया जाए या फिर जुगसलाई नगर पालिका में शामिल किया जाए. यह मांग समिति ने दिशा की अगली बैठक में रखने का सुझाव भी दिया है.
समिति के अध्यक्ष सुबोध झा के नेतृत्व में वर्ष 2005 से अब तक कुल 776 बार आंदोलन, धरना, घेराव, भूख हड़ताल और विधानसभा घेराव जैसे जनआंदोलन किए जा चुके हैं. 30 अगस्त 2012 को जमशेदपुर से रांची तक पदयात्रा करते हुए विधानसभा का घेराव किया गया था. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर, डीपीआर बनाने और हाउसिंग कॉलोनी में नई पाइपलाइन बिछाने के लिए 1 करोड़ 10 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी.
बाद में 2015 में मुख्यमंत्री रघुवर दास की पहल पर बागबेड़ा और छोटा गोविंदपुर के लिए 237 करोड़ 21 लाख रुपये की जलापूर्ति योजना को केंद्र, राज्य और वर्ल्ड बैंक की संयुक्त भागीदारी से मंजूरी मिली थी. इस योजना को 2018 तक पूरा करना था, लेकिन अब तक यह अधूरी है.
समिति ने यह भी बताया कि 2022 में दिल्ली पदयात्रा के दौरान लोकसभा घेराव के लिए निकले आंदोलनकारियों को राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा रास्ते में लिखित आश्वासन देकर आंदोलन से रोका गया था.
सांसद विद्युत वरण महतो ने वर्ष 2022 में लोकसभा में यह मुद्दा उठाया था, जिसके बाद प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की ओर से योजना को पूरा कराने का आश्वासन दिया गया था. जल जीवन मिशन के तहत इसे 26 जुलाई 2024 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन राज्य सरकार की उदासीनता के चलते काम ठप पड़ा है.
समिति ने सांसद से फिर से लोकसभा में आवाज उठाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कराने की मांग की है, ताकि बागबेड़ा की जनता को शीघ्र स्वच्छ पेयजल मिल सके.
