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JAMSHEDPUR NEWS: गोपाल मैदान में उमड़ा जनसैलाब, शहीद गंगा नारायण सिंह की जयंती पर 55 हजार लोगों ने रचा इतिहास

जमशेदपुर: लौहनगरी का ऐतिहासिक गोपाल मैदान वीर शहीद गंगा नारायण सिंह की 236वीं जयंती के अवसर पर जनशक्ति का गवाह बना। इस महासम्मेलन में झारखंड ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और असम से आए करीब 55 हजार लोगों की भागीदारी ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। पारंपरिक वेशभूषा, मांदर की थाप और ‘जय गंगा नारायण’ के नारों से पूरा बिष्टुपुर इलाका गूंज उठा।

पारंपरिक संस्कृति और कला का अद्भुत संगम

कार्यक्रम की शुरुआत भूमिज समाज की समृद्ध परंपराओं के साथ हुई। समाज की बालिकाओं और विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने मांदर और नगाड़ों की थाप पर मनमोहक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। झारखंड की माटी से जुड़ी इन प्रस्तुतियों ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मैदान में जिधर भी नजर जा रही थी, समाज की एकता और सांस्कृतिक गौरव की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

“समाज जाग चुका है, अब हक लेकर रहेंगे”: संजीव सरदार

पोटका विधायक संजीव सरदार ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि वीर गंगा नारायण सिंह का संघर्ष समाज के स्वाभिमान की पहचान है। उन्होंने कहा, “एक समय था जब हमारे महानायक के इतिहास को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन आज उमड़ा यह जनसैलाब प्रमाण है कि समाज जाग चुका है।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को अपना हथियार बनाएं और अपनी भाषा-संस्कृति को बचाने के लिए एकजुट रहें।

विधायकों ने भरी हुंकार, एकता पर दिया जोर

समारोह में क्षेत्र के कई प्रमुख जन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया:

गणमान्य अतिथियों और बुद्धिजीवियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान समाज के उत्थान में योगदान देने वाले बुद्धिजीवियों और विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। समारोह में पूर्व विधायक मेनका सरदार, सीदेश्वर सरदार, हरीश भूमिज, विभीषण सिंह भूमिज, और टाटा स्टील फाउंडेशन के संजय सरदार सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे। असम से आई जूली भूमिज और रिंकी भूमिज के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के दीनबंधु सिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

ऐतिहासिक सफलता और भविष्य का संकल्प

आयोजन समिति ने इस ऐतिहासिक सफलता के लिए सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने न केवल वीर शहीद गंगा नारायण सिंह को श्रद्धांजलि दी, बल्कि भूमिज समाज की राजनीतिक और सामाजिक एकजुटता का भी बड़ा संदेश दिया।


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