जमशेदपुर: बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ‘सहयोग’ द्वारा संत कबीरदास की जयंती के अवसर पर बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन के प्रयाग कक्ष में विचार गोष्ठी और काव्य-पाठ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अवतार सिंह और संस्था के पदाधिकारियों ने मां सरस्वती व संत कबीर के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया। इसके पश्चात उपासना सिन्हा ने सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर पूरे सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
कबीर की वाणी कुरीतियों पर करारी चोट: अवतार सिंह
बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में अवतार सिंह ने कबीर के जीवन-दर्शन और भक्तिकालीन साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान पर विस्तार से चर्चा की। पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कबीर की वाणी सत्य, साहस, प्रेम और सामाजिक बदलाव की आवाज है। उन्होंने जोर देकर कहा, “कबीर केवल गाने या किताबों में पढ़ने का विषय नहीं हैं, बल्कि उनके आदर्शों को व्यावहारिक जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है। समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कबीर की चोट आज के दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक है।” इससे पहले संस्था की कार्यकारी अध्यक्ष जूही समर्पिता ने अवतार सिंह को शॉल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया।
भजनों और दोहों से आध्यात्मिक हुआ माहौल
संस्था की अध्यक्ष संध्या सिन्हा ने अपने स्वागत भाषण में कबीर की निर्भीकता और उनके समतावादी दृष्टिकोण को रेखांकित किया। कार्यक्रम की विषय-प्रवेशिका प्रस्तुत करते हुए रागिनी भूषण ने कबीर के भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, ज्योत्सना अस्थाना ने कबीर के प्रसिद्ध दोहों का सस्वर गायन कर माहौल को कबीरमय बना दिया।
कवयित्रियों ने बिखेरे सामाजिक सरोकार के रंग
आयोजन के दूसरे सत्र में शहर की चुनिंदा कवयित्रियों ने कबीर की चिंतनधारा से प्रेरित अपनी स्वरचित रचनाओं का पाठ किया। काव्य-पाठ करने वाली प्रमुख कवयित्रियों में प्रियंका सिंह, ममता कर्ण ‘मनस्वी’, पद्मा प्रसाद ‘बिन्देश्वरी’, अनीता निधि, नीलम पेड़ीवाल, उपासना सिन्हा, बबली मीरा, आशा गुप्ता, प्रणति शरण और ज्योत्सना अस्थाना शामिल रहीं। इन सभी ने प्रेम, समरसता और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं से खूब तालियां बटोरीं।
साहित्यकारों का उमड़ा हुजूम
इस गरिमामयी कार्यक्रम का सफल संचालन रीना सिन्हा ‘सलोनी’ ने किया, जबकि संस्था की पूर्व अध्यक्ष मुदिता चन्द्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर सबिता पॉल, मधुचंदा चक्रवर्ती, हरि मित्तल, कृष्णा सिन्हा, छाया प्रसाद, सुधा गोयल, पुष्पा कुमारी, पुष्पा सिंह, माधुरी मिश्रा, मनीला कुमारी, ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र, हीरालाल गुप्ता, अनिता सिंह समेत शहर के अनेक साहित्यकार व प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
