
जमशेदपुर
बिष्टुपुर स्थित चैम्बर भवन में सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, जिला उद्योग केन्द्र (DIC) और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (EPCH) के संयुक्त तत्वावधान में “हस्तशिल्प निर्यात विपणन” विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय हस्तशिल्प कलाकारों, हैंडलूम उद्यमियों, टेक्सटाइल व्यवसायियों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करना था।
विकसित भारत-2047 में हस्तशिल्प की अहम भूमिका
कार्यक्रम की शुरुआत में सिंहभूम चैम्बर के अध्यक्ष मानव केडिया ने उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि हस्तशिल्प, हथकरघा और टेक्सटाइल क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भर भारत अभियान के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के सपने को साकार करने में स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों की बड़ी भूमिका होगी।
उन्होंने बताया कि सिंहभूम चैम्बर लगातार स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापार मेलों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है, जिससे छोटे उद्योगों को नए ग्राहक और बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके।
नई नीति के तहत उद्योगों को मिलेंगी सुविधाएं
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक रविशंकर प्रसाद ने कहा कि झारखंड सरकार की नई औद्योगिक एवं टेक्सटाइल नीति के तहत उद्योगों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को कई प्रकार की सब्सिडी एवं वित्तीय सहायता दी जा रही है। उन्होंने हस्तशिल्प और हैंडलूम क्षेत्र से जुड़े लोगों से इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने कारोबार को आगे बढ़ाने की अपील की।
निर्यात की रणनीति और सरकारी योजनाओं की जानकारी
झारखंड उद्योग विभाग की अधिकारी सोनीधान ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सरकारी योजनाओं, वित्तीय अनुदानों और उद्योग विकास से जुड़ी पहलों की विस्तृत जानकारी दी। वहीं EPCH पटना के सहायक प्रबंधक नितेश कुमार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पादों की मांग, मार्केटिंग रणनीति और निर्यात प्रक्रिया की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि काउंसिल देश और विदेश में आयोजित ट्रेड फेयर में भाग लेने के लिए कारीगरों और उद्यमियों को सहयोग प्रदान करती है। कई अवसरों पर उन्हें सब्सिडी और निःशुल्क स्टॉल की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
B2B नेटवर्किंग का सफल उदाहरण
कार्यक्रम के प्रश्नोत्तर सत्र में बिजनेस-टू-बिजनेस नेटवर्किंग की एक सफल मिसाल देखने को मिली। एक जूट बैग व्यवसायी ने बाजार और ऑर्डर होने के बावजूद सप्लायर नहीं मिलने की समस्या बताई। इस दौरान पोटका की एक महिला उद्यमी ने बताया कि वह बड़े स्तर पर जूट बैग बनाती हैं, लेकिन उन्हें उचित बाजार की आवश्यकता है। कार्यक्रम स्थल पर ही दोनों के बीच व्यापारिक सहयोग की सहमति बनी, जिसे आयोजन की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।
कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन चैम्बर उपाध्यक्ष अनिल मोदी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने दिया। मौके पर मानद महासचिव पुनीत कावंटिया, उपाध्यक्ष हर्ष बाकरेवाल, सचिव बिनोद शर्मा, कोषाध्यक्ष सीए अनिल रिंगसिया, बैंक ऑफ इंडिया के एलडीएम संजीव कुमार चौधरी सहित कला मंदिर, टाटा स्टील फाउंडेशन, आंजनेय बैम्बू क्लस्टर और अविवा हैंडीक्राफ्ट्स के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम ने स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित किया।
