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JAMSHEDPUR NEWS: पटमदा-बोड़ाम सिंचाई योजना के लिए सांसद विद्युत महतो ने केंद्र से मांगी मदद, PMKSY में शामिल करने की उठाई मांग

जमशेदपुर। पटमदा और बोड़ाम के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने केंद्र सरकार के समक्ष पहल तेज कर दी है। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की सचिव अर्चना वर्मा से मुलाकात कर पटमदा-बोड़ाम मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत केंद्रीय सहायता में शामिल करने की मांग की।

सांसद ने इस दौरान पटमदा-बोड़ाम और नीमडीह-कुकड़ू की दोनों मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को एक साथ स्वीकृति देने तथा उनके कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने का आग्रह किया।

12 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने का प्रस्ताव

सांसद विद्युत महतो ने सचिव को बताया कि 19 दिसंबर 2025 को केंद्रीय जल आयोग की स्क्रीनिंग कमेटी ने पटमदा-बोड़ाम (12,000 हेक्टेयर) और नीमडीह-कुकड़ू (9,500 हेक्टेयर) मेगा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं का मूल्यांकन किया था।

उन्होंने कहा कि 27 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार ने लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत वाली नीमडीह-कुकड़ू योजना को मंजूरी दे दी, लेकिन पटमदा-बोड़ाम योजना अब भी लंबित है। उन्होंने दोनों योजनाओं के साथ अलग-अलग व्यवहार पर सवाल उठाते हुए पटमदा-बोड़ाम योजना को भी जल्द स्वीकृति देने की मांग की।

चांडिल डैम में पानी, लेकिन पटमदा-बोड़ाम के खेत अब भी प्यासे

सांसद ने कहा कि पटमदा-बोड़ाम पूर्वी सिंहभूम का आदिवासी बहुल और कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां के किसान सीमित संसाधनों के सहारे सब्जियों की खेती कर आजीविका चलाते हैं। इसके बावजूद चांडिल जलाशय नजदीक होने पर भी नहर और लिफ्ट सिंचाई की सुविधा के अभाव में किसानों को बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि चांडिल जलाशय का पानी खेतों तक पहुंचाने की व्यवस्था होने से क्षेत्र की लगभग 12 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिल सकता है। इससे किसानों को खेती के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

झारखंड को 1000 करोड़ की केंद्रीय सहायता देने की मांग

सांसद ने मंत्रालय के समक्ष झारखंड को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत केंद्रीय सहायता नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 के बाद से राज्य को इस योजना के तहत कोई केंद्रीय सहायता नहीं मिली है।

उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य को कम से कम 1,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिलनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि राज्य की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को केंद्रीय योजनाओं में शामिल किया जाए।

सांसद ने रखीं ये दो प्रमुख मांगें

केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की सचिव के समक्ष सांसद ने निम्न मांगें रखीं:

  1. राज्य सरकार से तत्काल वार्ता कर पटमदा-बोड़ाम और नीमडीह-कुकड़ू दोनों मेगा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं को एक साथ स्वीकृति देकर उनके कार्यान्वयन की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

  2. दोनों योजनाओं को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

सांसद ने कहा कि यह मामला उनके संसदीय क्षेत्र के गरीब आदिवासी किसानों की आजीविका से जुड़ा है। इसलिए इस पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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