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JAMSHEDPUR NEWS: निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम, डीसी का सख्त निर्देश- ‘किसी खास दुकान से कॉपी-किताब और ड्रेस खरीदने का दबाव नहीं बना सकते स्कूल’

जमशेदपुर।

नए शैक्षणिक सत्र (Academic Session) की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली और कॉपी-किताबों के नाम पर अभिभावकों के आर्थिक शोषण की शिकायतें आने लगती हैं। इन पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिले में संचालित निजी विद्यालयों की फीस संरचना को पारदर्शी, न्यायसंगत और सरकारी नियमों के अनुरूप बनाए रखने के उद्देश्य से उपायुक्त (DC) श्री कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों की मॉनिटरिंग के लिए गठित ‘जिला स्तरीय कमिटी’ की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शिक्षा विभाग के आला पदाधिकारी और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्हें उपायुक्त ने आवश्यक और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मनमानी फीस वृद्धि पर प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

बैठक के दौरान उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने एकदम स्पष्ट लहजे में निर्देश दिया कि सभी निजी विद्यालय केवल राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही अपनी फीस में वृद्धि कर सकते हैं। किसी भी परिस्थिति में स्कूलों द्वारा अनियमित या मनमानी फीस वृद्धि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई स्कूल ऐसा करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का यह कदम उन हजारों अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत है, जो हर साल निजी स्कूलों की बेतहाशा फीस वृद्धि से आर्थिक रूप से परेशान रहते हैं।

फीस रसीद में देनी होगी पाई-पाई की स्पष्ट जानकारी

कई बार अभिभावकों को यह पता ही नहीं चलता कि उनसे किस मद (Head) में पैसे वसूले जा रहे हैं। इस भ्रामक स्थिति को खत्म करने के लिए प्रशासन ने सभी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है कि छात्रों को दी जाने वाली ‘फीस रसीद’ (Fee Receipt) में प्रत्येक मद का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। इसमें ट्यूशन फीस, विद्यालय विकास शुल्क, परिवहन शुल्क (Transport Fee), और परीक्षा शुल्क आदि की जानकारी अलग-अलग और साफ अक्षरों में दर्ज होनी चाहिए। इससे अभिभावकों को यह पूरी पारदर्शिता के साथ पता चलेगा कि उनके द्वारा दी गई राशि का पाई-पाई किस मद में खर्च हो रहा है।

स्कूल परिसर में सार्वजनिक करने होंगे कमिटी के नाम और नंबर

शिकायतों के त्वरित निवारण और पारदर्शिता को और अधिक पुख्ता करने के लिए उपायुक्त ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। इसके तहत प्रत्येक निजी विद्यालय को अपने स्कूल परिसर में एक विधिवत रूप से गठित ‘फीस निर्धारण कमिटी’ (Fee Fixation Committee) का गठन करना होगा। इस कमिटी के सभी सदस्यों के नाम, उनका पदनाम और उनके संपर्क नंबर (Contact Numbers) विद्यालय परिसर के किसी प्रमुख स्थान या नोटिस बोर्ड पर बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किए जाने चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि अभिभावकों को आवश्यक जानकारी सहजता से मिल सके और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सुलभ और अत्यधिक प्रभावी बन सके।

खास दुकान से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने की बाध्यता खत्म

प्रायः यह देखा जाता है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को स्कूल से ही या फिर शहर की किसी विशेष या चुनिंदा दुकान से महंगी किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म (ड्रेस) और अन्य पठन-पाठन सामग्री खरीदने के लिए विवश करते हैं। उपायुक्त ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सख्त आदेश दिया है कि कोई भी विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या बुक स्टोर से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। अभिभावकों को बाजार में अपनी सुविधा, बजट और पसंद के अनुसार कहीं से भी सामग्री खरीदने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी।

होगी कड़ी कार्रवाई, लगातार रखी जाएगी निगरानी

प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्कूल द्वारा इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है या अभिभावकों से इस प्रकार की कोई भी शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध नियमानुसार और सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिला प्रशासन की टीम द्वारा समय-समय पर विद्यालयों का औचक निरीक्षण और निगरानी की जाएगी। प्राप्त शिकायतों का त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया जाएगा। अंत में, उपायुक्त ने सभी विद्यालय प्रबंधनों से अपील की है कि वे शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के इस अभियान में प्रशासन का पूरा सहयोग करें और अभिभावकों के साथ एक पारदर्शी और जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं।


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