Lahar Chakra

Jamshedpur News :SCCI ने JBVNL की 59% टैरिफ वृद्धि का किया कड़ा विरोध, कहा– अक्षमता का बोझ उद्योगों पर न डालें

जमशेदपुर।

सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI) ने रांची में आयोजित झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) की मल्टी-ईयर टैरिफ (MYT) याचिका पर सार्वजनिक सुनवाई में प्रस्तावित 59% टैरिफ वृद्धि का कड़ा विरोध दर्ज कराया।

चैंबर अध्यक्ष मानव केडिया ने 28% वितरण हानि को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि प्रबंधन की विफलता और अक्षमता का बोझ उद्योगों व उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।

“बेहतर प्रदर्शन के बिना अपग्रेडेशन नहीं”

श्री केडिया ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार कोई विद्यार्थी यदि संतोषजनक प्रदर्शन नहीं करता तो उसे अगली कक्षा में प्रोन्नति नहीं मिलती, उसी प्रकार बिना लक्ष्य प्राप्त किए किसी संस्था को अतिरिक्त मांग का अधिकार नहीं होना चाहिए।

उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि रणजी में अच्छा प्रदर्शन किए बिना कोई खिलाड़ी आईपीएल या भारतीय टीम में जगह की उम्मीद नहीं कर सकता। इसी तरह JBVNL ने पूर्व वर्षों में वितरण हानि कम करने के लक्ष्य पूरे नहीं किए, ऐसे में टैरिफ वृद्धि प्रस्ताव न्यायसंगत नहीं है।

पावर परचेज कॉस्ट और ट्रांसमिशन शुल्क पर सवाल

चैंबर ने पावर परचेज कॉस्ट में वृद्धि के दावे पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि NTPC और DVC द्वारा केवल 5% वृद्धि का हवाला दिया गया है, जबकि कोयले की कीमतें स्थिर या कम हुई हैं।

साथ ही JUSNL के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क में 6-8% वृद्धि को अक्षमता का परिणाम बताया गया। RDSS योजना के तहत जब हानियां कम करने के प्रयास हो रहे हैं, तब पुरानी हानियों का भार उद्योगों पर डालना अनुचित है।

उद्योगों पर पड़ेगा गंभीर असर

चैंबर ने कहा कि प्रस्तावित 50% ऊर्जा शुल्क और 25% फिक्स्ड चार्ज वृद्धि उद्योगों के लिए असंगत और अनुचित है। जमशेदपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्र में इससे 15-20% उत्पादन लागत वृद्धि हो सकती है, जिससे रोजगार, निवेश और राज्य की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी।

वर्तमान में उद्योग पहले ही कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।

चरणबद्ध समाधान की मांग

ACOS-ABR अंतर और रेगुलेटरी एसेट के मुद्दे पर चैंबर ने कहा कि अचानक भारी वृद्धि के बजाय चरणबद्ध समाधान अपनाया जाए।

अंत में SCCI ने आयोग से प्रस्तावित टैरिफ वृद्धि को अस्वीकार करने तथा JBVNL को पहले T&D हानियों को राष्ट्रीय मानक 15-18% तक लाने और संचालनात्मक सुधारों का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करने का निर्देश देने की मांग की।

सुनवाई में SCCI प्रतिनिधिमंडल के महासचिव पुनीत काउंटिया, उपाध्यक्ष हर्ष बांकेरवाल और सचिव विनोद शर्मा भी उपस्थित थे।

Exit mobile version